Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

अपना घर

अपना घर

जय प्रकाश कुवंर
औरों के महलों की बात दिगर है।
अपना घर तो बस अपना घर है।।
घास फूस की झोपड़ी हो या फिर,
बना हुआ हो एक सुंदर सा मकान।
उसी आशियाने को अपना कहने में,
हर किसी को होता है, अलग गुमान।।
जिसको अपना घर नहीं होता,
उस दुखियारे की मत पूछो बात।
ना तो चैन से उसका दिन कटता है,
नहीं खुशी से उसकी बीतती रात।।
गर्मी जाड़ा तो फिर भी कट जाता है,
मैदानों में खुले आसमान के नीचे।
लेकिन जब वर्षा ऋतु आती है,
वह दिन रात रोता है आंखे मींचे ।।
घर वाला भी भले मस्ती के लिए,
देश विदेश बाहर घुमने जाता है।
लेकिन जब तक अपने घर ना लौटे,
चैन कहाँ उसको आता है।।
पंछी उड़ते खुले आसमान में,
फिर भी पेड़ों पर अपना घर बनाते हैं।
अपनी गृहस्थी बढ़ाने और सुख के लिए,
तिनके जोड़ जोड़ घोंसला सजाते हैं।।
चाहे पंछी चाहे मानव , घर के बिना,
दुनिया में नहीं किसी का गुजारा है।
जैसा भी हो , लेकिन अपना घर हो,
इस दुनिया में उसका जीवन ही न्यारा है।।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ