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“माँ और ममता”

“माँ और ममता”

✍️डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
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माँ की ममता सदा निराली,
सबसे लगती प्यारी-भाली।।


मुन्ना जब भी। रोने लगता,
माँ का प्यार उसे बहलाता।।
धीरे-धीरे उसे मनाती,
लोरी गाकर नींद सुलाती।।
हँसकर देती सुख के साज,
माँ की ममता उसका राज।।०१।।


सुबह-सुबह जब भोर सुहाती,
माँ हँसकर मुझको जगाती।।
दूध-रोटी प्यार से देती,
मीठी बातें रोज सुनाती।।
हर दुख में बन जाती साचा,
माँ की ममता सुख का ताजा।।०२।।


गिर जाए जब खेल-खेल में,
दर्द छिपे उसके मन में।।
माँ दौड़ी-दौड़ी आ जाती,
चोट सहलाकर भूल कराती।।
ममता का मरहम है साचा,
माँ से बढ़कर नहीं सहारा।।०३।।


पढ़ने को जब मन घबराता,
माँ हिम्मत फिर से दिलवाती।।
सपनों की वह राह दिखाती,
जीवन जीना भी सिखलाती।।
माँ सजाती जीवन का साज,
माँ की ममता में छुपा राज।।०४।।


माँ की ममता सदा निराली,
सबसे लगती प्यारी-भाली।।
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