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द्विदिवसीय आचार्य कुल झारखंड प्रांत अधिवेशन 2026 का भव्य शुभारंभ

द्विदिवसीय आचार्य कुल झारखंड प्रांत अधिवेशन 2026 का भव्य शुभारंभ

रांची स्थित वाई.बी.एन. विश्वविद्यालय परिसर में द्विदिवसीय आचार्य कुल झारखंड प्रांत अधिवेशन 2026 का आज अत्यंत गरिमामय एवं भव्य शुभारंभ हुआ। अधिवेशन का उद्घाटन विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति प्रो. (डॉ.) चंद्र भूषण शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार एवं शैक्षणिक गरिमा से ओत-प्रोत रहा।
प्रथम सत्र में प्रांत के महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश ने प्रांतीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संगठन की अब तक की गतिविधियों एवं भावी योजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन रिद्धिमा एवं दिव्य ने संयुक्त रूप से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया।

वाई.बी.एन. विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति डॉ. रामजी यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “आचार्य कुल समाज में नैतिक एवं शैक्षणिक मूल्यों के पुनर्स्थापन का सशक्त माध्यम है।”
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) चंद्र भूषण शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “एक स्वस्थ समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

आचार्य कुल झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पांडेय ने अधिवेशन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जबकि उपाध्यक्ष डॉ. वासुदेव प्रसाद ने शिक्षा में संस्कारों के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया।

विभिन्न वक्ताओं—महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश, सह मंत्री डॉ. रवि सिंह, रांची जिला अध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमार, मंत्री डॉ. रूपसी कुमारी, समन्वयक डॉ. मिताली चक्रवर्ती एवं डॉ. जय प्रकाश पांडेय—ने “स्वस्थ समाज रचना: दशा एवं दिशा” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
द्वितीय सत्र में आयोजित समूह चर्चा में डॉ. रूपसी कुमारी (रांची), डॉ. कविता सिन्हा (हजारीबाग), डॉ. तारकेश्वर (रामगढ़), डॉ. मनु झा (साईनाथ विश्वविद्यालय), डॉ. विमला पांडेय, डॉ. कमल बोस (सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची), डॉ. अजेश कुमार अंजेश, डॉ. अनमोल, डॉ. राकेश दत्त मिश्र, डॉ. शालिनी एवं भारत सरकार महिला आयोग की सदस्या डॉ. ममता दीदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अधिवेशन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। आचार्य धर्मेंद्र ने आचार्य कुल के उद्देश्य एवं स्वरूप पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथियों में अर्क जैन यूनिवर्सिटी, जमशेदपुर के कुलपति डॉ. अंगद तिवारी, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद कुमार, उदय मेमोरियल बी.एड. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सी. के. पंकज सहित अन्य शिक्षाविदों ने विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
साथ ही डॉ. अरविंद कुमार लाल, डॉ. अमित सिन्हा एवं डॉ. हरीश ने भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह संपूर्ण आयोजन वाई.बी.एन. विश्वविद्यालय के विनोबा भावे विचार सेल द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की सीएमडी डॉ. अंकिता यादव, कुलपति डॉ. सत्यदेव पोद्दार, डॉ. शुभाशीष, डॉ. कैलाश नाथ, डॉ. संगीता गोप, डॉ. पिंकी, डॉ. मांडवी, डॉ. संजय, डॉ. संजय तिवारी एवं डॉ. ममता मनीष सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अधिवेशन की सफलता में बी.एड. के प्रशिक्षु शिक्षकों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। इनमें विशेष रूप से खुशी, अमन प्रभात, तनवीर चौधरी, देवाशीष, आकृति भारद्वाज, आदर्श, गुंजन, अंकिता, रीता, अंशिका, बबीता, सबीना, निशा, पिंकी सहित अन्य सभी प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, समर्पण एवं सक्रिय सहभागिता का उत्कृष्ट परिचय दिया।
अधिवेशन के अंतर्गत आयोजित साहित्यिक संध्या विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें डॉ. मिताली चक्रवर्ती, डॉ. संध्या चौधरी एवं अहेन्जिता चटर्जी ने भजन, नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अधिवेशन के आगामी सत्रों में भी “स्वस्थ समाज रचना: दशा एवं दिशा” विषय पर गहन एवं व्यापक विचार-विमर्श जारी रहेगा।

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