Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

बिहार: विश्व सभ्यता का शाश्वत उद्गम और अमर विरासत

बिहार: विश्व सभ्यता का शाश्वत उद्गम और अमर विरासत

सत्येंद्र कुमार पाठक
बिहार केवल भारत का एक प्रशासनिक राज्य नहीं है; यह मानवीय चेतना, आध्यात्मिकता और राजनीतिक क्रांति का वह केंद्र है जिसने समय-समय पर विश्व इतिहास की दिशा बदली है। 'विहार' शब्द से उपजा यह नाम बौद्ध भिक्षुओं की तपोभूमि होने का प्रमाण है। लेकिन इसका इतिहास बुद्ध से भी हजारों वर्ष पूर्व 'सतयुग' की गहराइयों तक जाता है। गंगा की निर्मल धारा और मगध की कठोर पहाड़ियों के बीच बसी यह संस्कृति त्याग, तपस्या और तत्वज्ञान का अनूठा संगम है। बिहार की हिंदी , मगही , बज्जिका , मैथिली , भोजपुरी , अंगिका , सोनपरिया , सोन तिरिया क्षेत्रीय , अंग्रेजी , उर्दू भाषाओं का संगम बिहार है । आर्ष परंपरा और पौराणिक वैभव में बिहार की भूमि ऋषियों के मंत्रों और देवताओं के संकल्पों से सिंचित है। सतयुग और गयासुर का आत्मोत्सर्ग: पौराणिक काल में असुरराज गयासुर ने अपनी देह का दान देकर गया को 'मोक्ष नगरी' के रूप में प्रतिष्ठित किया। भगवान विष्णु के पदचिह्न आज भी यहाँ आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को पितृ-ऋण से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बिहार अनादि काल से ही जन्म और मृत्यु के रहस्यों को सुलझाने वाली भूमि रही है। ऋषि-मुनियों की तपोस्थली: बक्सर के सिद्धआश्रम में महर्षि विश्वामित्र ने न केवल तपस्या की, बल्कि भगवान राम और लक्ष्मण को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी। महर्षि च्यवन की तपस्थली (सीवान/छपरा क्षेत्र) आरोग्य का केंद्र बनी, तो लोमश ऋषि और वाल्मीकि ने इस मिट्टी पर बैठकर रामायण जैसे अमर महाकाव्यों का सृजन किया। महर्षि कर्दम और कपिल मुनि के सांख्य दर्शन की गूँज भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है। त्रेता की जानकी और द्वापर का शौर्य: सीतामढ़ी का पुनौरा धाम मर्यादा और भक्ति का केंद्र है, जहाँ माता सीता का प्राकट्य हुआ। वहीं द्वापर में, महासम्राट जरासंध ने राजगीर (गिरिव्रज) को अभेद्य दुर्ग बनाया। मुंगेर और भागलपुर (अंग देश) के राजा दानवीर कर्ण का नाम आज भी त्याग की सर्वोच्च पराकाष्ठा के रूप में लिया जाता है। ज्ञान की प्रखर रश्मियाँ: विदुषी और मनीषी बिहार ने सदैव मेधा और तर्क को प्रधानता दी है। विदुषी परंपरा: राजा जनक की सभा में गार्गी का शास्त्रार्थ और बाद में मंडन मिश्र की धर्मपत्नी भारती द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य को पराजित करना, बिहार की नारी शक्ति और बौद्धिक प्रखरता का ऐतिहासिक साक्ष्य है। बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति (बोधगया) और महावीर स्वामी का जन्म (वैशाली) एवं निर्वाण (पावापुरी)—इन दो महापुरुषों ने बिहार की मिट्टी से पूरी दुनिया को 'अहिंसा परमो धर्म:' और 'मध्यम मार्ग' का संदेश दिया।
सत्ता और शास्त्र का संगम में प्राचीन काल में मगध विश्व की राजनीतिक राजधानी थी। चाणक्य और चंद्रगुप्त: पाटलिपुत्र के दुर्ग से आचार्य चाणक्य ने 'अर्थशास्त्र' की रचना की और चंद्रगुप्त मौर्य के माध्यम से भारत को एक सूत्र में पिरोया। सम्राट अशोक और धम्म: अशोक महान ने कलिंग विजय के बाद 'युद्ध घोष' को 'धम्म घोष' में बदल दिया। उनके शिलालेखों ने अफ़गानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक शांति का प्रकाश फैलाया। विज्ञान का स्वर्ण युग: आर्यभट्ट ने पटना के समीप 'तारेगना' (खगोल) में बैठकर ग्रहों की गति नापी और शून्य की अवधारणा देकर आधुनिक विज्ञान का आधार रखा। बाणभट्ट की 'कादंबरी' और मयूर भट्ट के 'सूर्यशतक' ने संस्कृत साहित्य को विश्वव्यापी पहचान दी।
मध्यकाल में बिहार ने सत्ता के बड़े शेरशाह सूरी का उदय: सासाराम की धरती से निकले शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित कर दिल्ली पर अधिकार किया। उन्होंने 'रुपया' चलाया, 'डाक प्रणाली' विकसित की और प्रसिद्ध 'ग्रैंड ट्रंक रोड' (सड़क-ए-आज़म) बनवाई, जो आज भी एशिया की जीवनरेखा है। मुगल काल और पटना: मुगल काल के दौरान पटना (अजीमाबाद) व्यापार और सूफी संस्कृति का बड़ा केंद्र बना। गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म स्थान होने के कारण पटना साहिब सिखों के लिए श्रद्धा का केंद्र बना। ब्रिटिश काल और विद्रोह: 1764 के बक्सर युद्ध के बाद बिहार अंग्रेजों के अधीन हुआ, लेकिन संघर्ष की ज्वाला कभी ठंडी नहीं हुई। 1857 में जगदीशपुर के वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उम्र में अपनी भुजा काटकर गंगा को अर्पित कर दी, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे साहसी गाथा है। आधुनिक बिहार: साहित्य और संकल्प का सूर्योदय आधुनिक बिहार का उदय बौद्धिक और राजनीतिक चेतना के साथ हुआ। चंपारण और गांधी: 1917 में नीलहे गोरों के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह ने भारतीय राजनीति को 'अहिंसा' का अचूक अस्त्र दिया। स्वतंत्रता के शिल्पी: डॉ. राजेंद्र प्रसाद की विद्वता और सादगी, डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा की दूरदर्शिता (आधुनिक बिहार के निर्माता) और महाराजा कामेश्वर सिंह का शिक्षा के प्रति दान, बिहार के गौरव को पुनः स्थापित करने वाले स्तंभ बने। लोकनायक जयप्रकाश नारायण: 1974 की 'संपूर्ण क्रांति' ने लोकतंत्र की मर्यादा को नई परिभाषा दी। साहित्यिक आकाश के नक्षत्र में बिहार की भूमि ने हिंदी साहित्य को वह प्राणवायु दी, जिसके बिना वह अधूरा है। विद्यापति: मैथिल कोकिल ने श्रृंगार और भक्ति को एक धरातल पर ला खड़ा किया। आधुनिक रत्न: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की हुंकार, रामवृक्ष बेनीपुरी की शब्द-चित्रकारी, शिवपूजन सहाय की भाषाई शुचिता, जानकीवल्लभ शास्त्री की काव्य-चेतना और रामदयाल पाण्डेय जैसे मनीषियों ने बिहार को 'साहित्य का मक्का' बना दिया। मोहनलाल महतो 'वियोगी' की रचनाओं ने समाज की संवेदनाओं को छुआ।
भूगोल, नदियाँ और सांस्कृतिक वैभव में बिहार की नदियों ने न केवल भूमि को सींचा है, बल्कि सभ्यता को पाला है। नदी तंत्र:में गंगा यहाँ की जीवनधारा है, तो सोन और पुनपुन मगध की संस्कृति का आधार हैं। गंडक, बागमती, कोसी और फल्गु (अंतःसलिला) का आध्यात्मिक और आर्थिक महत्व अतुलनीय है। मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर का सिल्क, मिथिला की पेंटिंग और वैशाली का लिच्छवी गणतंत्र (विश्व का प्रथम लोकतंत्र)—ये सब मिलकर एक विविधतापूर्ण बिहार का निर्माण करते हैं। बिहार की विरासत और हमारा उत्तरदायित्व आज 22 मार्च 2026 को, जब हम 114वाँ बिहार दिवस मना रहे हैं, हमें यह समझना होगा कि हमारी विरासत केवल पत्थरों और भग्नावशेषों में नहीं, बल्कि हमारे विचारों में है। नालंदा और विक्रमशिला के पुस्तकालय भले ही जल गए हों, लेकिन बिहार की मेधा आज भी आईएएस परीक्षा से लेकर वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। बिहार क्षेत्र की विरासत' को संजोना केवल इतिहास का संरक्षण नहीं है, बल्कि भविष्य के निर्माण का ब्लूप्रिंट है। आइए, ऋषियों की इस तपोभूमि और क्रांतिकारियों की इस कर्मभूमि को पुनः विश्व गुरु बनाने का संकल्प लें।
"जहाँ बुद्ध मुस्कुराए, महावीर स्वामी जहाँ अशोक ने शांति पाई, वह पावन भूमि मेरा बिहार है।"


हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ