Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"अनाहूत क्षण का सत्य"

"अनाहूत क्षण का सत्य"

सब कुछ वैसा ही रहता है—
दीवारों पर टंगी घड़ियाँ
यांत्रिक निष्ठा से समय गिनती रहती हैं,
और हम,
अपने ही बनाए क्रमों में
जीवन को व्यवस्थित मान लेते हैं।


दिन, अपने परिचित उजाले में
कोई रहस्य नहीं खोलता,
साँझ भी थकी हुई
बस एक और अंत का अभ्यास करती है—
जैसे सब कुछ निश्चित है,
और कुछ भी अचानक नहीं होगा।


पर जीवन की सतह के नीचे
एक अदृश्य हलचल है,
जहाँ नियति
बिना आहट के
अपने निर्णय लिखती रहती है—
निःशब्द, निर्विकार।


हम योजनाओं में उलझे रहते हैं,
कल के लिए जगह बचाते हुए,
यह जाने बिना
कि समय के पास
हमारे लिए
कोई पूर्व-सूचना नहीं होती।


एक क्षण—
जो अन्य क्षणों से भिन्न नहीं दिखता,
वही अचानक
अर्थ बदल देता है
अस्तित्व का,
और श्वास का।


मृत्यु,
कोई विस्फोट नहीं करती,
वह धीरे से आती है—
जैसे कोई अनजान अतिथि
दरवाज़ा खोलकर
अंदर प्रवेश कर जाए।


और तब,
जीवन बिना शोर किए
अपने को समेट लेता है—
जैसे लहर
किनारे को छूकर
वापस सागर में विलीन हो जाए।


शेष रह जाता है—
एक रिक्तता,
जो पूछती नहीं,
सिर्फ संकेत देती है
कि जो था,
वह अब स्मृति में ही जीवित है।


. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️ "कमल की कलम से"✍️ (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ , https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ