तीन राजस्व पदाधिकारी निलंबित, हड़ताल पर सख्त हुए उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा

- उपमुख्यमंत्री बोले, अराजकता और भ्रामक बयानबाजी बर्दाश्त नहीं, काम पर लौटने वालों को राहत
- 50 फीसदी राजस्व पदाधिकारी हैं कार्यरत, बाधा डालने वालों पर भी होगी सख्त कार्रवाई
पटना : राज्य में जारी अंचल अधिकारियों एवं राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए तीन राजस्व पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। माननीय उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग श्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, अनुशासनहीनता एवं भ्रामक बयान देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निलंबित किए गए अधिकारियों में अररिया के अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री जितेंद्र पांडे, पटना सदर के अंचलाधिकारी श्री रजनीकांत तथा पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन अंचल के अंचलाधिकारी श्री आनंद कुमार शामिल हैं। सभी का इस अवधि में मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, पूर्णिया निर्धारित किया गया है। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवा आचार नियमावली 1978 के नियम 8, 9 एवं 10 के तहत की गई है। माननीय उपमुख्यमंत्री ने इसे अनुशासन कायम रखने की दिशा में आवश्यक कदम बताया है।
माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत राजस्व पदाधिकारी कार्य कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि जिलाधिकारियों और अपर समाहर्ताओं द्वारा भेजी गई रिपोर्ट से हुई है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष के समापन को देखते हुए कार्य निष्पादन अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभी इसी विभाग द्वारा जनगणना के कार्य की भी मॉनिटरिंग की जा रही है। 17 अप्रैल से स्व गणना का काम शुरू होना है। इसकी तैयारी चल रही है। विभाग द्वारा कई अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में जो अधिकारी शीघ्र अपने कार्य पर लौट आते हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन, सरकार के आदेशों की अवहेलना करने और कामकाज में बाधा डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि मीडिया में भ्रामक प्रचार-प्रसार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। किसी भी प्रकार की अराजकता स्वीकार नहीं की जाएगी। गुमराह करने वाले वक्तव्य देने वालों को निलंबित किया जाएगा।
उन्होंने त्यागपत्र दे चुके एवं एक राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने वाले पूर्व राजस्व पदाधिकारी आदित्य शिवम शंकर के आचरण एवं कार्यों की जांच कराने का भी निर्णय लिया है। इस संबंध में एक त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें श्री महेंद्र पाल को अध्यक्ष तथा श्रीमती मोना झा एवं श्री नवाजिश अख्तर को सदस्य बनाया गया है। समिति मामले की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। इनके कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया है।सरकार ने दोहराया है कि जनहित सर्वोपरि है और प्रशासनिक अनुशासन से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
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