होली तो हो ली, अब काम पर चलते हैं,
रंग बिरंगे रंग छोड, अब काम में रंगते हैं।चला गया सर्दी का मौसम, गर्मी आयी है,
प्रफुल्लित मन से लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
कम्बल रज़ाई सिमट गये, ए सी की मौसम आया,
कोट स्वेटर बात पुरानी, अब कुर्ता पाजामा भाया।
खेतों में फूल रही सरसों, गेहूँ भी तत्पर आने को,
लौकी तौरी भिंडी पालक, खाने को मन हर्षाया।
नया संवत नव वर्ष, चैत्र माह से शुरू हुआ,
नवरात्रि में नव उर्जा का, संचार शुरू हुआ।
तितली भौरें धूम मचा, कली कली इठलाते,
किसान खुश, नयी फसल आना शुरू हुआ।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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