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होली

 होली

अरुण दिव्यांश
होली होली बोली आई ,
बच्चों की ये टोली आई ,
नीले काले हरे व लाल ,
रंग ले गोली भोली आई ।
लाल सारे ही लाल हुए ,
चमकी में गुलाल लिए ,
बच्चों संग बच्चों के घर ,
निकले हैं रूमाल लिए ।
मन अब मलाल लिए ,
बच्चों संग धमाल किए ,
श्रेष्ठ पद को नमन कर ,
संस्कृति में कमाल किए ।
लाल हरे पीले गाल किए ,
धीमी तीव्र हैं चाल किए ,
बालमन निर्भीक देख ,
टल सीधे है काल लिए ।
लालों के सब लाल हैं ,
लाल हुए पीले लाल हैं ,
लालों को कोई रोक ले ,
किसका क्या मजाल है !


पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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