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वसंतागमन पर गया जी में होली के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक स्वरूप पर संगोष्ठी

वसंतागमन पर गया जी में होली के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक स्वरूप पर संगोष्ठी

गया के गोल बगीचा स्थित डॉक्टर विवेकानंद पथ में वसंतागमन के पावन अवसर पर भारतीय ब्राह्मण महासभा द्वारा एक गरिमामयी एवं ज्ञानवर्धक सभा का आयोजन किया गया। इस विशिष्ट कार्यक्रम की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने की। सभा का शुभारंभ वैदिक मंगलाचार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार हुआ।

सभा में उपस्थित विद्वानों ने होली के आध्यात्मिक, सामाजिक तथा सूक्ष्म वैज्ञानिक पहलुओं पर गंभीर और सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि होली केवल रंगों और उत्सव का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ऋतु परिवर्तन के साथ जुड़ा एक प्राचीन आरोग्य-विधान भी है। उन्होंने बताया कि जब प्रकृति शिशिर से वसंत की ओर अग्रसर होती है, तब शरीर में संचित कफ और जड़ता को दूर करना आवश्यक हो जाता है। ऐसे में होलिका-दहन की अग्नि वातावरण को शुद्ध करती है तथा उसकी परिक्रमा से शरीर के रोमकूप खुलते हैं, जिससे आंतरिक विकार बाहर निकलते हैं। इस प्रकार होली हमारे पूर्वजों द्वारा दिया गया एक वैज्ञानिक और स्वास्थ्यप्रद संदेश है।

ज्योतिष शिक्षा एवं शोध संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज ने रंगों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होली में प्राकृतिक एवं प्रकृति-सम्मत रंगों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पीत और अरुण वर्ण ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता के संचार में सहायक होते हैं तथा यह पर्व मन की मलिनता को दूर कर नवचेतना का संचार करता है।

महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं आयुर्वेदाचार्य आचार्य सचिदानंद मिश्र नैकी ने आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से होली के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बसंत ऋतु में शरीर में कफ की वृद्धि से आलस्य और शिथिलता उत्पन्न होती है, जिसे होलिका-दहन की ऊष्मा और सामूहिक उत्सव की ऊर्जा संतुलित करती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ढोल-नगाड़ों की ध्वनि केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शरीर के आंतरिक कंपन को सक्रिय कर मानसिक विकारों को दूर करने का एक प्राचीन उपाय है।

जलालपुर काली मंदिर के महंत साधक गौरी शंकर मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि होली परंपरा और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक पुष्प-आधारित रंगों के उपयोग पर जोर दिया और पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित ब्राह्मण समाज ने यह संकल्प लिया कि वे अपने आचरण और नेतृत्व के माध्यम से समाज को संयमित, स्वस्थ और मर्यादित रूप से होली मनाने की प्रेरणा देंगे।

कार्यक्रम के अंत में महासभा एवं कौटिल्य मंच की सचिव तथा प्रसिद्ध समाजसेवी चंदना पाठक ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि होली केवल आनंद का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति सम्मान का महोत्सव है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मतेज और वसंत की समवेत आभा में संपन्न यह आयोजन गया नगरी के सांस्कृतिक जीवन में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में स्थापित होगा।इस अवसर पर मोहम्मद याहिया, दीपक पाठक, रवि जी, दीपक प्रसाद, गोरख सिंह, लवली पूनम, रविंद्र यादव, तसलीमा, रंजन पांडेय, पंकज कुमार, किरण पाठक, नीलम कुमारी, प्रदीप कुमार सिंह, विभा रानी, पवन मिश्रा एवं रंजीत पाठक सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया।
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