
सोचो भारत के जनमानस
हृदय नारायण झाब्राह्मण महत्व (अष्टादशी) गीत
सकल विश्व समुदाय के लिए ब्राह्मण ही शुभचिन्तक है।
सोचो भारत के जनमानस कौन तेरा हितचिन्तक है।1l
ब्राह्मण में ही समदर्शन और मैत्री का वह भाव है दिखता।
लोक में सेवा त्याग सहित करने का वह जज्बा भी दिखता।
सबके हित का साधनकर्ता ब्राह्मण पुरहित होता है।
सोचो भारत के…l2l
बारहो वर्ण का एक पुरोहित ब्राह्मण है इहलोक में।
सबके हित स्वस्तिवाचन करता ब्राह्मण इहलोक में।
सबको शुभसंकल्प कराता ब्राह्मण ही वह लोक है।
सोचो भारत के…….l3l
शिक्षक रूप में ब्राह्मण बच्चों को सन्तान समझता है।
मानवीय गुण धर्म ज्ञान ज्ञान की नैतिकता बतलाता है।
ब्राह्मण ही उन्नत उत्तम पीढ़ी निर्माण में दिखता है।
सोचो भारत के…..l4l
ब्राह्मण वैद्य चिकित्सक डाक्टर दया धर्म दिखलाता है।
आत्मीय बनकर मरीज को सेवा अर्पण करता है।
ब्राह्मण के सानिध्य में आज भी पाप ताप मिट जाता है।
सोचो भारत के…..l5l
नैयायिक है ब्राह्मण तो चाणक्य नीति का भाव है उनमें ।
नीर क्षीर का हो विवेक ऐसी है न्याय व्यवस्था इनमें l
न्यायोचित निर्णय सबके हित ब्राह्मण में ही दिखता है।
सोचों भारत के…….l6l
चिन्ता की है बात कि ब्राह्मण राजनीति में आज नहीं है।
जो जन्मना है वह भी गुण और कर्म से नहीं ब्राह्मण है।
राजनीति में ऐसा हर अगुआ(ब्राह्मण) पिछलग्गू दिखता है।
सोचो भारत के……..l7l
भीम आर्मीवाले तुम भी अन्तर्मन से मिलकर सोचो।
कौन तेरे पुरखों में ब्राह्मण का विरोधी रहा है सोचो।
बड़े बुजुर्गों में संबोधन ब्राह्मणदेवता दिखता है।
सोचो भारत के……l8l
आज समय है जाति धर्म से ऊपर उठकर सोच जगाओ ।
मानवीय समता सामाजिकता समरसता भाव जगाओ ॥
सम भावों का गाँव बसे ब्राह्मण के भाव में दिखता है।
सोचो भारत के…..l9l
अष्टौ पूर्व निमित्तानि कह विदुर नीति ने बता दिया है।
ब्राह्मण विरोध से विनाश होता कैसा ये बता दिया है।
जहाँ कहीं ब्राह्मण विरोध होता वो राष्ट्र मिट जाता है।
सोचो भारत के…..l10l
आज नहीं जनता का कोई प्रतिनिधि, ब्राह्मण देख रहा है।
छिपा नहीं है कुछ ब्राह्मण से, ब्राह्मण सब कुछ देख रहा है।
कौन है कैसा जनहितकारी ब्राह्मण को ही दिखता है।
सोचो भारत के……l11l
जाति धर्म का भेद मिटाकरमिलकर वैदिक गान करेंगे l
सकल विश्व परिवार है अपना सब मिलजुल कर जीयेंगे।
सर्वहितैषी भाव आज आज भी ब्राह्मण में ही दिखता है।
सोचो भारत के……l12l
आज यहाँ नेतृत्व कला कौशल का घोर अभाव खटकता।
योग्य सुयोग्य कुशल नेतृत्व नहीं है इस गणतंत्र में दिखता।
स्वार्थ सहित सत्ता शासन का आधिपत्य ही दिखता है।
सोचो भारत के……l13l
उन्नत उत्तम पीढ़ी का निर्माण नहीं वह सोच रहा है।
उर्जावान युवाशक्ति का सदुपयोग न सोच रहा है।
पक्ष विपक्षी दो पाटन के बीच में जनहित पिसता है।
सोचो भारत के…..l14l
रामलला का भक्ति भाव दिखानेवाले प्रधानमंत्री l
राम की मर्यादा के लीक से हटकर चलते सारे मंत्री।
घरती और आकाश कुपित है ब्राह्मण को ही दिखता है।
सोचो भारत के…..l15l
कभी दिखाबे का आडम्बर काम नहीं आता है।
एक समय के बाद दिखाबा सत्य प्रगट करता है।
किसका कैसा ज्ञान कर्म है ब्राह्मण को ही दिखता है।
सोचो भारत के……l16l
आज हमें फिर से चाणक्य की नीति मार्ग में चलना है।
सत्त्तामद में चूर स्वार्थी हर नेतृत्व बदलना है।
वयं राष्ट्रे जागृयामः ब्राह्मण आज भी कहता है।
सोचो भारत के……l17l
पैसठ संवत्सर अद्यावधि जीवन का अनुभव है जिनसे ।
जिसने ब्राह्मण ज्ञान कर्म देकर भेजा इहलोक में उनसे ।
प्राप्त दृष्टि में पुनर्जागरण काल का दर्शन दिखता है।
सोचो भारत के जनमानस कौन तेरा हितचिन्तक है।18l
हृदय नारायण झा
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