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बिहार विधान परिषद् में रानी अब्बक्का की 500वीं जयंती पर भव्य संगोष्ठी आयोजित

बिहार विधान परिषद् में रानी अब्बक्का की 500वीं जयंती पर भव्य संगोष्ठी आयोजित

पटना, 21 मार्च 2026: आज बिहार विधान परिषद् सभागार में 16वीं शताब्दी की वीरांगना रानी अब्बक्का चौटा की 500वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन महिला समन्वय समिति की प्रांत संयोजिका प्रोफ़ेसर पूनम सिंह के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

वीरता और स्वाभिमान की प्रतीक रानी अब्बक्का

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य देश की इस महान वीरांगना के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और महिला सशक्तिकरण के संदेश को समाज तक पहुंचाना था। रानी अब्बक्का चौटा तटीय कर्नाटक की पहली तुलुवा रानी थीं, जिन्होंने लगभग चार दशकों तक पुर्तगाली औपनिवेशिक आक्रमणों का डटकर मुकाबला किया। उन्हें भारत की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है।

महिलाओं को जागरूक करने का आह्वान

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. पूनम सिंह ने कहा कि भारतीय नारी त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति रही है, लेकिन वर्तमान समय में समाज कई चुनौतियों से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास को जानना और उससे प्रेरणा लेना अत्यंत आवश्यक है, ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी संतुलन बना सकें और भारत को पुनः गौरवशाली बना सकें।

मुख्य वक्ता किरण घई का ओजस्वी संबोधन

मुख्य वक्ता किरण घई ने कहा कि आज देश विशेष परिस्थितियों में खड़ा है, जहां महिलाओं को आगे आकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने रानी अब्बक्का चौटा के पराक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने पुर्तगालियों के कर की मांग को अस्वीकार करते हुए सीमित संसाधनों के बावजूद हजारों सैनिकों का सामना किया।

विशिष्ट अतिथि मैथिली ठाकुर का प्रेरणादायक वक्तव्य

प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने कहा कि संगीत और संस्कृति व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार और शिक्षा ही व्यक्ति को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि संगीत ने उन्हें भावनाओं को समझने और समाज से जुड़ने का अवसर दिया।

संस्कृति और संगठन की आवश्यकता पर बल

कार्यक्रम में माननीय सुनीता हल्देकर ने कहा कि समाज को सशक्त बनाने के लिए संगठन और संस्कार दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्षों के कार्यकाल ने महिलाओं को संगठित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम में कई सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। महिलाओं के अधिकार, स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि महिलाओं को सशक्त और जागरूक बनाया जा सके।

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