आगामी 14 जून को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में होगा 37वीं सुदर्शन सभा का आयोजन

वाराणसी। यहां पर स्थित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में आगामी 14 जून को 37वीं सुदर्शन सभा का आयोजन किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके संबंध में सुदर्शन सभा के प्रमुख श्री योगेश जी द्वारा हमें बताया गया कि देशभर की ऐसी प्रतिभाओं को यहां पर सम्मानित किया जाएगा, जो हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान के लिए कार्य कर रही हैं। जिनके त्याग, तपस्या और साधना से राष्ट्र को विशेष लाभ हो रहा है।
यहां पर यह उल्लेखनीय है कि श्री योगेश जी स्वयं एक राष्ट्र साधक के रूप में संपूर्ण राष्ट्र में अपना सम्मान पूर्ण स्थान रखते हैं। उनका पूरा जीवन त्याग ,तपस्या और साधना का जीवन है। उन्होंने अपने आप को मोमबत्ती के रूप में प्रस्तुत कर राष्ट्र कल्याण के लिए समर्पित किया है। उनका जीवन राष्ट्रीय मुद्दों की पुनर्स्थापना के लिए प्रस्तुत है। उन्होंने संघर्ष और साधना को जीवन का लक्ष्य बनाया है। उनकी मान्यता है कि वैदिक संस्कृति के माध्यम से ही हम संसार को सही मार्ग दिखा सकते हैं। पुराने भारत ने अपने चक्रवर्ती सम्राटों की परंपरा में संपूर्ण विश्व का नेतृत्व किया था, जब संपूर्ण विश्व पर आर्य वैदिक राजाओं का शासन था, तब हिंदुत्व की तूती सारे संसार में बोलती थी। मनुस्मृति जैसे महान ग्रंथ के माध्यम से सारे संसार का उपकार होता था। लोगों को सामाजिक और राजनीतिक मूल्यों के साथ-साथ धार्मिक मूल्यों का ज्ञान प्राप्त होता था। जब हम राष्ट्र साधना की बात करते हैं तो हमें अपने भारत के इसी अतीत की पुनः स्थापना के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि आज देश के सामने जिस प्रकार की सांप्रदायिक चुनौतियों को खड़ा किया जा रहा है ,वे देश को तोड़ने की मानसिकता को प्रकट करती हैं। जिसका सामना करने के लिए इस समय हमको बौद्धिक चेतना के प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। इसके लिए विचार यज्ञ और वैचारिक क्रांति करने के लिए ही परिवर्तन योगेश संस्था का निर्माण किया गया है। श्री कृष्ण जी ने जिस प्रकार शंखनाथ कर तत्कालीन समाज से देशविरोधी शक्तियों का विनाश किया था, वही लक्ष्य आज परिवर्तन योगेश का है। इसके प्रत्येक सदस्य को राष्ट्र के सामने मुँह बाए खड़ी सभी समस्याओं के समाधान के लिए योगेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज के शंखनाद को आज अपने हृदय में अवश्य सुनना चाहिए।
योगेश परिवर्तन संस्था के अध्यक्ष श्री योगेश जी ने कहा कि हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने ऋषि पूर्वजों के विचारों के अनुसार अपने भारत का निर्माण करें। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए पूरे देश से उन प्रतिभाओं को तलाशा और तराशा जा रहा है जो देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने आप को सहर्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी देश के लिए समर्पित रहे, उनके जीवन से निकलने वाले संदेश से अनेक युवाओं ने देश धर्म की रक्षा के लिए संकल्प लिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय संस्कृति को व्यापक स्तर पर बल मिला। उन्होंने आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धांजलि के साथ मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में भी महान क्रांति की। जिसका परिणाम हम सबके सामने है कि आज का युवा शिक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के विचारों की क्रांति की मसाल की यों ही जलती रहे और यह राष्ट्र रक्षा के अपने महान संकल्प के प्रति समर्पित रहे, यही हम सब का उद्देश्य है।
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