Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

कलम के रिश्तें

कलम के रिश्तें

संजय जैन


मैं जो भी लिखता हूँ
उसे वो प्यार से गाती।
मेरी शब्दों में वो
चार चाँद लगा देती।।


मेरे लिखने का अंदाज
उसे पसंद आता है।
इसलिए वो मुझको यारों
बुलाती है मिलने को।।


मगर में जा नही पाया।
अभी तक उनसे मिलने को।
इरादा क्या वो रखते है
जिसे में समझ नही पाया।।


बड़ा ही विचित्र चित्रण है।
जिसे में लिख नही सकता।
पर शब्दों के भावों को।
लिखने से रोक नही सका।।


चलो करते है सेवा हम।
अपने परिवार वालों की।
जो दुख-सुख में साथ दे
वो ही सच्चा साथी है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ