मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी
कुमार महेंद्ररम्य सौम्य मधुर बेला,
प्रणय भाव चरम बिंदु ।
वंदन परिणय भाल प्रतिष्ठा,
तन मन समागम सुधा सिंधु ।
मस्त मलंग उर अठखेलियां,
स्वप्न लड़ियां यथार्थ वरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।
अंग प्रत्यंग यौवन उभार,
संपूर्ण स्पर्श अप्रतिम चाह ।
गमन संकल्प जीवन पथ,
हर पल मनोरमा अथाह ।
नवल धवल आशा उमंग,
तृषा तृप्ति पथ विचरणी।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।
विपरीत कुल द्वि पथिक,
सहर्ष तत्पर दांपत्य अनुबंध ।
रग रग जोश उत्साह अपार,
परस्पर मुस्कान जीवन सुगंध ।
सुषुप्त भाव चैतन्य पटल,
संवाद स्पंदन निजता धरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।
सोलह श्रृंगार मोहक सोहक,
अंतःकरण मंगल पावन ।
पुरुषार्थ वेदी अथाह चमक,
सेज सुरभित प्रसून बिछावन ।
श्री गणेश जीवन स्वर्ण अध्याय,
भाव भंगिमा आनंद तरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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