Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी

मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी

कुमार महेंद्र
रम्य सौम्य मधुर बेला,
प्रणय भाव चरम बिंदु ।
वंदन परिणय भाल प्रतिष्ठा,
तन मन समागम सुधा सिंधु ।
मस्त मलंग उर अठखेलियां,
स्वप्न लड़ियां यथार्थ वरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।


अंग प्रत्यंग यौवन उभार,
संपूर्ण स्पर्श अप्रतिम चाह ।
गमन संकल्प जीवन पथ,
हर पल मनोरमा अथाह ।
नवल धवल आशा उमंग,
तृषा तृप्ति पथ विचरणी।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।


विपरीत कुल द्वि पथिक,
सहर्ष तत्पर दांपत्य अनुबंध ।
रग रग जोश उत्साह अपार,
परस्पर मुस्कान जीवन सुगंध ।
सुषुप्त भाव चैतन्य पटल,
संवाद स्पंदन निजता धरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।


सोलह श्रृंगार मोहक सोहक,
अंतःकरण मंगल पावन ।
पुरुषार्थ वेदी अथाह चमक,
सेज सुरभित प्रसून बिछावन ।
श्री गणेश जीवन स्वर्ण अध्याय,
भाव भंगिमा आनंद तरणी ।
मधु यामिनी_नेह की निर्झरणी ।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ