कल्पनाओं का शाश्वत उत्सव: राष्ट्रीय परी कथा दिवस
सत्येन्द्र कुमार पाठक
प स्मृतियों की गलियों से एक यात्रा में "एक समय की बात है..." (Once upon a time...) — ये चार शब्द केवल एक कहानी की शुरुआत नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी खिड़की हैं जो हमें वास्तविकता की सीमाओं से परे एक जादुई दुनिया में ले जाती हैं। हर साल 26 फरवरी को मनाया जाने वाला 'राष्ट्रीय परी कथा दिवस' (National Tell a Fairy Tale Day) हमें उसी मासूमियत, आश्चर्य और असीमित संभावनाओं वाले बचपन की याद दिलाता है। यह दिन केवल परियों या जिन्नों की कहानियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस मानवीय क्षमता का सम्मान है जो असंभव में भी विश्वास करना जानती है। इतिहास की गहराई में: कहाँ से आया यह जादू परी कथाओं का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि स्वयं मानवता। आधुनिक शोध बताते हैं कि कुछ कहानियाँ, जैसे 'द स्मिथ एंड द डेविल', लगभग 6,000 साल पुरानी हैं, जो कांस्य युग (Bronze Age) से मौखिक रूप से चली आ रही हैं।
यद्यपि ये कहानियाँ हज़ारों साल पुरानी थीं, लेकिन इन्हें 'परी कथा' (Fairy Tale) नाम बहुत बाद में मिला। सत्रहवीं शताब्दी के अंत में (1697), फ्रांसीसी लेखिका मैडम डी'ऑलनॉय ने अपनी रचनाओं के लिए 'conte de fées' (परियों की कहानी) शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने इन कहानियों को दरबारों और महफिलों का हिस्सा बनाया, जहाँ वयस्क भी इनका उतना ही आनंद लेते थे ।
राष्ट्रीय परी कथा दिवस का 26 फरवरी को मनाया जाना किसी सरकारी आदेश का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कहानीकारों, लेखकों और पुस्तकालय प्रेमियों द्वारा शुरू की गई एक सांस्कृतिक लहर है।
मौखिक परंपरा का पुनरुद्धार: इस दिन का मुख्य उद्देश्य 'कहानी सुनाने' (Storytelling) की उस कला को जीवित रखना है जो डिजिटल युग के शोर में कहीं खो गई है।साहित्यिक जुड़ाव: फरवरी के अंत में, जब दुनिया सर्दियों की विदाई और वसंत का स्वागत कर रही होती है, पुरानी लोककथाओं को याद करना नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। विल्हेम ग्रिम (प्रसिद्ध ग्रिम ब्रदर्स में से एक) का जन्मदिन 24 फरवरी को होता है, जो इस सप्ताह को परी कथाओं के लिए और भी प्रासंगिक बनाता है। परी कथाओं के स्तंभ ने कहानियों को अमर बनाया परी कथाओं के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं, जिनके बिना यह उत्सव अधूरा है: भाइयों ग्रिम (Brothers Grimm): जैकब और विल्हेम ग्रिम ने 19वीं सदी में जर्मनी की लोककथाओं को इकट्ठा किया। 'सिंड्रेला', 'स्नो व्हाइट' और 'हेंसल और ग्रेटेल' जैसी कहानियाँ आज उन्हीं की बदौलत हमारे पास हैं।हंस क्रिश्चियन एंडरसन: डेनमार्क के इस लेखक ने हमें 'द लिटिल मरमेड' और 'द अगली डकलिंग' जैसी कहानियाँ दीं, जिनमें अक्सर गहरा दुख और फिर अंत में एक मार्मिक सीख होती थी।
ईसप और पंचतंत्र: प्राचीन ग्रीस के ईसप और भारत के विष्णु शर्मा (पंचतंत्र के रचयिता) ने पशु-पक्षियों के माध्यम से ऐसी कहानियाँ रचीं जो जादुई भी थीं और नैतिक मूल्यों से भरी भी थीं।
परी कथाओं के शौकीनों के लिए साल में दो बड़े अवसर होते हैं:पहलू राष्ट्रीय परी कथा दिवस (26 फरवरी) अंतर्राष्ट्रीय परी दिवस (24 जून)मुख्य फोकस कहानियाँ पढ़ने और सुनाने पर। परियों के अस्तित्व और लोककथाओं के जश्न पर।प्रकृति शैक्षिक और साहित्यिक। उत्सवपूर्ण और काल्पनिक।गतिविधि किताबें पढ़ना, कहानी सत्र आयोजित करना। प्रकृति में परियों को खोजना, जादुई वेशभूषा पहनना है।प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि परी कथाएं बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डर का सामना करना: कहानियों में राक्षसों या चुड़ैलों का होना बच्चों को यह सिखाता है कि बुराई मौजूद है, लेकिन साहस और बुद्धिमानी से उसे हराया जा सकता है।
नैतिक मूल्य: "सच्चाई की हमेशा जीत होती है" — यह संदेश परी कथाओं का मूल आधार है।
कल्पना की उड़ान: आइंस्टीन ने एक बार कहा था, "यदि आप अपने बच्चों को बुद्धिमान बनाना चाहते हैं, तो उन्हें परी कथाएं पढ़ाएं।" ये कहानियाँ मस्तिष्क की रचनात्मक सीमाओं को आज परी कथाएं केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं। डिज़्नी (Disney) जैसी फिल्मों ने इन कहानियों को दृश्य रूप देकर घर-घर पहुँचाया है। हालाँकि, मूल कहानियाँ अक्सर डार्क और गंभीर होती थीं, जिन्हें समय के साथ बच्चों के लिए सरल और सुखद बनाया गया। आज के दौर में, 'राष्ट्रीय परी कथा दिवस' हमें उन मूल कहानियों की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित करता है जिनमें जीवन के गहरे सत्य छिपे हैं। अपने मोबाइल फोन को एक घंटे के लिए बंद करें और बच्चों को या अपने दोस्तों को कोई पुरानी लोककथा सुनाएं। पुस्तकालय की यात्रा: पास के किसी पुस्तकालय में जाएं और परी कथाओं के पुराने संस्करण खोजें।
रचनात्मक लेखन: अपनी खुद की एक जादुई कहानी लिखें जिसमें आपका शहर या गाँव एक जादुई नगरी बन जाए।
फिल्म नाइट: किसी क्लासिक परी कथा पर आधारित फिल्म को परिवार के साथ देखें।
जादू अभी खत्म नहीं हुआ है राष्ट्रीय परी कथा दिवस हमें याद दिलाता है कि भले ही हम बड़े हो गए हों और दुनिया तर्कों और विज्ञान से चलती हो, लेकिन हमारे भीतर का वह बच्चा आज भी किसी जादुई चमत्कार की प्रतीक्षा करता है। ये कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि "सुखांत" (Happy Ending) केवल किताबों में नहीं होते, बल्कि हमारी उम्मीदों और संघर्षों में भी छिपे होते हैं।तो, इस 26 फरवरी को, एक किताब उठाएं, एक कहानी सुनाएं और विश्वास करें कि जादू आज भी मौजूद है—बस उसे देखने के लिए थोड़ी कल्पना और थोड़े बचपन की जरूरत है।
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