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पटना को मूक-बधिर मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: 17 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट हेतु कानपुर रवाना

पटना को मूक-बधिर मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: 17 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट हेतु कानपुर रवाना

'पटना, 16 फरवरी 2026

"श्रवण श्रुति कार्यक्रम” के तहत 0-6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक श्रवण जाँच में ओएई पॉजिटिव पाए गए 17 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए सोमवार को स्व० एस० एन० मेहरोत्रा मेमोरियल ई०एन०टी० फाउन्डेशन, कानपुर भेजा गया। इससे पहले जिला पदाधिकारी, पटना ने पटना समाहरणालय में इन बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। इस अवसर पर अभिभावकों के चेहरे पर खुशी और उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी।

जिलाधिकारी ने कहा कि जन्मजात और प्रारंभिक अवस्था में श्रवण बाधिता की पहचान, स्क्रीनिंग, परीक्षण और उपचार सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस दिशा में सघन और समन्वित प्रयास किए जाएं।

'1.18 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग, 246 में सुनने की समस्या चिन्हित

जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि पटना जिला में अब तक करीब 1,18,000 बच्चों की श्रवण स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 246 बच्चों को सुनने की समस्या से ग्रस्त पाया गया। ओएई प्रतिवेदन के आधार पर 89 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट हेतु चिन्हित किया गया है, जिनमें से 59 बच्चों को अब तक निःशुल्क कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सुविधा दी जा चुकी है। सभी बच्चों को नियमित स्पीच थेरैपी भी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हेतु विभिन्न बैचों में बच्चों को कानपुर भेजा जा रहा है और सभी की सर्जरी सफलतापूर्वक हो रही है।

'6 माह में 500 बच्चों की सर्जरी का लक्ष्य

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इस वर्ष छह माह के भीतर पटना के 500 मूक-बधिर बच्चों का कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि उन्हें सुनने और बोलने की क्षमता प्राप्त हो सके। इसके लिए कम उम्र में ही ऐसे बच्चों की पहचान और जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम आयु के सभी मूक-बधिर बच्चों का समुचित उपचार, सर्जरी और थेरैपी के माध्यम से पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा।

'समन्वित प्रयास से मिलेगा परिणाम

जिलाधिकारी ने कहा कि पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त बनाना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कल्याण विभाग, सिविल सोसायटी और अभिभावकों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग, तत्पर और प्रतिबद्ध रहना होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों, स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों, सामुदायिक उत्प्रेरकों, आशा कार्यकर्ताओं और लेडी सुपरवाइजर के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाए।

'जीवन-परिवर्तनकारी पहल

जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं। ऐसे में “श्रवण श्रुति कार्यक्रम” एक समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली का उदाहरण है।

उन्होंने कहा, “यह पहल न सिर्फ बच्चों को सुनने की शक्ति दे रही है, बल्कि उनके जीवन में नई आशा, नई ऊर्जा और एक नई आवाज़ लौटा रही है।"

प्रशासन का संकल्प स्पष्ट है 'कोई भी बच्चा पीछे न छूटे'।

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