मांडवी रामायण की जाह्नवी
कुमार महेंद्रअनन्य सौंदर्य मल्लिका ,
राम हिय प्रिय सिय अनुजा ।
दशरथ नंद भरत भार्या,
कुशध्वज चंद्र भांगा तनुजा ।
सदा निर्वहन दांपत्य धर्म,
अनंत नमन नंदीग्राम साध्वी ।
मांडवी रामायण की जाह्नवी ।।
व्यक्तित्व अंतर विद्वता निर्झर,
परम आस्था गौरा भक्ति ।
कैकयी वरदान दृष्टा तटस्थ,
विपरीत बिंदु अथाह शक्ति ।
दर्श राम प्रति भरत समर्पण,
हृदय विरक्ति सिक्त भानवी ।
मांडवी रामायण की जाह्नवी ।।
आत्मबल दृढ़ संकल्प अद्भुत,
विपरीत पथ ध्येय अटल ।
तज राजसी ठाठ बाट वैभव,
परिणय सिद्धि पर्णकुटी पटल ।
महिमा हीन जानकी भगिनी,
इतिहास अंतर विस्मृत ज्ञानवी ।
मांडवी रामायण की जाह्नवी ।।
जप तप त्याग तपस्या,
रामवल्लभा वैदेही सम ।
वरण शरण परोक्ष वनवास,
सहयोग भरत राज काज प्रक्रम ।
उपमा अनजानी सी विरहनी,
राम सीता हित प्रथम ध्यानवी ।
मांडवी रामायण की जाह्नवी ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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