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जीबीएम कॉलेज में एनएसएस इकाई एवं दशरा के संयुक्त तत्त्वावधान में मानव तस्करी पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन

जीबीएम कॉलेज में एनएसएस इकाई एवं दशरा के संयुक्त तत्त्वावधान में मानव तस्करी पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन

  • प्रलोभनों एवं झूठे वादों के चंगुल में फँसने से बचें छात्राएँ: प्रधानाचार्य डॉ सीमा पटेल
  • 31 जनवरी 2026 को मानव तस्करी के विरुद्ध आयोजित होने वाले "वॉक फॉर फ्रीडम" में एनएसएस वॉलेंटियर्स होंगे शामिल

गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल की अध्यक्षता एवं एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी के संयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई एवं दलित असोसिएशन फॉर सोशल एण्ड ह्यूमन राइट्स अवेयरनेस (दशरा) के संयुक्त तत्त्वावधान में मानव तस्करी पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजित किया गया। प्रधानाचार्या डॉ पटेल ने दशरा, बिहार न्याय नेटवर्क के स्टेट कोअॉर्डिनेटर राजन शाह, प्रोग्राम मैनेजर नेफश क्रिस्टेन एवं रिसर्च असोसिएट महेश कुमार का स्वागत भेंट स्वरूप पौधा प्रदान करके किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं डॉ रश्मि ने अतिथि वक्ताओं का अभिनंदन करते हुए संगोष्ठी के विषय एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए गया सिविल कोर्ट के एडवोकेट एवं दशरा के बिहार राज्य समन्वयक राजन शाह ने मानव तस्करी को समाज के लिए कलंक एवं अत्यंत निंदनीय तथा दुर्भाग्यपूर्ण अपराध बताया। उन्होंने मानव तस्करों से पीड़ितों को बचाने के लिए दशरा द्वारा किये जा रहे प्रयासों एवं इस क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने मानव तस्करी का मूल उद्देश्य बल, धोखाधड़ी, सत्ता का दुरुपयोग, या दबाव का उपयोग करके मानवों की खरीद-बिक्री, स्थानांतरण, आश्रय अथवा रोजगार देने का प्रलोभन देकर शोषण करना बतलाया। कहा कि मानव तस्करों द्वारा बच्चियों और युवतियों को विवाह के झूठे सपने दिखाकर अथवा नौकरी का झूठा वादा करके वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है। मानव तस्कर अक्सर लोगों की गरीबी, असुरक्षा, परिवार में फूट, लोगों की उम्मीदों का फायदा उठाते हैं। आपदाएं एवं त्रासदियाँ तस्करों के लिए वरदान जैसी ही होती हैं।

दशरा के कार्यक्रम प्रबंधक नेफेश कुमार ने डाक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्मों द्वारा एनएसएस स्वयंसेवकों, एनसीसी कैडेटों एवं छात्राओं को बंधुआ मजदूरी, विवाह का प्रलोभन देकर युवतियों अथवा महिलाओं का यौन शोषण, जबरन श्रम, धोखे से अंग निकालना या जबरन भीख मंगवाना जैसी समस्याओं को समझाया। उन्होंने मानव तस्करी में सबसे अधिक पीड़ितों के आस-पड़ोस के लोगों, परिजनों तथा मित्रों के ही शामिल होने की बात कही। तस्कर बच्चों को बंधुआ मजदूर बनाकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं। उनसे चूड़ी कारखानों, निर्माण स्थलों, खेतों, एवं घरों में बिना मजदूरी के काम करवाया जाता है। लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उनकी इच्छा के विरुद्ध, धोखे से या ज़बरदस्ती, आर्थिक लाभ अथवा शोषण के इरादे से इस्तेमाल करते हैं, उनके अंगों को बेच डालते हैं, उन्हें गुलाम बना कर यौन शोषण करते हैं। मानव तस्करी किसी भी देश की सीमाओं के भीतर या सीमाओं के पार हो सकता है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्या पटेल ने मानव तस्करी से जुड़ी कुछ पुरानी घटनाओं को साझा किया। उन्होंने संस्था दशरा द्वारा मानव तस्करों के चंगुल से पीड़ित बच्चों, महिलाओं, एवं युवकों को बचाने के लिए अनवरत रूप से किये जा रहे प्रयत्नों की प्रशंसा की। साथ ही, प्रधानाचार्या ने एक अत्यंत लाभप्रद संगोष्ठी के आयोजन के लिए डॉ रश्मि सहित उपस्थित सहयोगी एनएसएस स्वयंसेवकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मानव तस्करी को एक गंभीर अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए छात्राओं को प्रलोभनों एवं झूठे वादों से बचने का परामर्श दिया।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ रश्मि ने कहा कि मानव तस्करी का शिकार कोई भी व्यक्ति हो सकता है, अतः हमें पीड़ितों के प्रति सहानुभूति रखते हुए उनकी यथासंभव सहायता करने को तत्पर रहना चाहिए। उनके प्रति घृणा, निंदा अथवा तिरस्कार का भाव नहीं रखना चाहिए। चूंकि मानव तस्करी की बुनियाद ही झूठ पर आधारित होती है, अतः किसी भी प्रलोभन, प्रस्ताव, एवं वादों पर अंधविश्वास न करते हुए स्वविवेक का प्रयोग करते हुए ही निर्णय लेना चाहिए। ऐसी किसी भी समस्या के आने पर विश्वस्त लोगों से मदद लेनी चाहिए। सावधान तथा सतर्क रहते हुए दूसरों को भी जागरूक करते रहना चाहिए। डॉ रश्मि ने बताया कि 31 जनवरी को मानव तस्करों से समाज को सावधान करने के लिए दशरा द्वारा प्रातः 7 बजे से गाँधी मैदान से शुरु होने वॉक फॉर फ्रीडम का आयोजन होगा, जिसमें जीबीएम कॉलेज एवं विभिन्न कॉलेजों के एनएसएस वॉलेंटियर्स भाग लेंगे। संगोष्ठी में डॉ जया चौधरी, डॉ अमृता कुमारी घोष, डॉ प्यारे माँझी, डॉ शुचि सिन्हा, डॉ अफ्शां नाहिद, डॉ वीणा जायसवाल, डॉ विजेता लाल, डॉ नुद्रतुन निसां, डॉ फातिमा, डॉ सीमा कुमारी, गीतांजलि, अनीषा, संजना, कसक, शिवानी आदि अनेक छात्राओं की उपस्थिति रही। सभी ने वक्ताओं से विषय पर प्रश्न पूछे।

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