पुस्तकें और वाचन संस्कृति विकसित समाज की पहचान - भारद्वाज .jpeg)
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इंदौर । पुस्तकें मानव को शिक्षित और ज्ञानी बनाकर न सिर्फ समाज को विकसित , मानव जीवन को सफल बनाती है वरन उन्नत और सभ्य समाज की पहचान ही है पुस्तकें और समृद्ध वाचन संस्कृति ।
यह विचार वरिष्ठ लेखक , चिंतक और हिन्दी आंदोलन परिवार के संस्थापक ,अध्यक्ष संजय भारद्वाज ने आपले वाचनालय द्वारा वाकड पुणे के अटलांटा -Il परिसर में स्थापित वाचनालय केंद्र के उद्घाटन अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए। इसके साथ ही इंदौर के प्रतिष्ठित साहित्य , कला , संस्कृति केंद्र आपले वाचनालय ने वाचन संस्कृति के संवर्धन की अपनी पुणे पहल का शुभारंभ किया । इस अवसर पर डॉ . कृष्ण कुलश्रेष्ठ ने जहां
वाचनालय सरोकार केंद्रित प्रभावी कविता का वाचन किया वहीं दीपक सराफ ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में समाज में रचनात्मक सहभागिता के श्रेष्ठत्व को प्रतिपादित किया । अतिथि स्वागत नन्हे शौर्य राशिनकर ने किया ।
सरस्वती पूजन व श्याम गुंडावर द्वारा गाई सरस्वती वंदना के पश्चात अतिथि द्वारा वाचनालय केंद्र का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का सुचारू संचालन श्रीति राशिनकर ने किया और आभार माना संदीप ने ।
इस अवसर पर सर्वश्री वाबले ,
आर.सी.सिंग , देशमुख , कालिदास जोशी , चौधरी , रवींद्र , कोडगिरे , अशोक भंडारी , अमोल गाढ़ेकर , गौरव श्रीवास्तव, धसे ,भरत खटावकर , दीपक शर्मा , आकाश भोंडवे एवं डॉ . निशा कुलश्रेष्ठ , मेघना , श्रेयस राशिनकर आदि प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।
प्रस्तुति_दुर्गेश मोहन बिहटा, पटना (बिहार)
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