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सरस्वती विद्या मंदिर उत्तरी शास्त्री नगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई सरस्वती पूजा

सरस्वती विद्या मंदिर उत्तरी शास्त्री नगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई सरस्वती पूजा

शास्त्री नगर।
ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा आज सरस्वती विद्या मंदिर, उत्तरी शास्त्री नगर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर विद्यालय परिसर संपूर्णतः भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत नजर आया। वैदिक मंत्रोच्चारण, श्लोक पाठ और वंदना से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजन-अर्चन से हुई, जिसमें विद्यालय की प्रधानाचार्या रूपम रानी ने विद्यार्थियों को माँ सरस्वती के महत्व, विद्या के आदर्श और संस्कारों के संरक्षण पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि माँ सरस्वती केवल ज्ञान की देवी नहीं, बल्कि विवेक, अनुशासन और सृजनशीलता की भी प्रतीक हैं, जिनके आदर्शों को जीवन में उतारना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है।
पूजा समारोह में विद्यालय की स्थानीय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष विनोद बिहारी सिन्ह की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं समिति के सचिव रामबलक प्रसाद एवं सह-सचिव हरिनारायण सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यालय परिवार के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे सांस्कृतिक एवं शैक्षिक आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया।
इस अवसर पर विद्यालय के लगभग 50 से 60 पूर्व छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की, जिससे आयोजन और अधिक भावनात्मक एवं प्रेरक बन गया। वर्तमान छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अभिभावकों ने भी पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। सभी ने मिलकर विद्यालय परिसर में शांति, स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखी, जो विद्यालय की संस्कार-प्रधान परंपरा को दर्शाता है।
पूजा-अर्चना के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने सहभागिता की। संपूर्ण आयोजन विद्यालय परिवार द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण एवं अनुकरणीय ढंग से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने माँ सरस्वती से विद्या, बुद्धि, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की।कुल मिलाकर, सरस्वती विद्या मंदिर उत्तरी शास्त्री नगर में आयोजित यह सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना को भी सुदृढ़ करने वाला आयोजन सिद्ध हुआ।
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