शिक्षा का उद्देश्य अपनी, बिल्कुल पाक साफ हो,
धर्म कर्म संस्कार संस्कृति, ज्ञान विज्ञान साथ हो।वेद ऋचाओं के हों हम ज्ञाता, ब्रह्मांड रहस्यों के,
सप्त लोक में छिपे रहस्य , इसका भी आभास हो।
कैसे बनता वज्र देह से, किसने जाना परखा सब,
मानवता हित अनुसंधानों का, सबको विश्वास हो।
पुराण उपनिषदों में वर्णित, धीर- वीर- गम्भीर बनें,
राष्ट्र धर्म सब धर्मों से आगे, इसका भी आभास हो।
ऋषि बनें तो जनक समान, जल बीच कमल जैसे,
सत्य अहिंसा परोपकार हो, शस्त्र शास्त्र आधार हो।
अहंकार छूने न पाये, स्वाभिमान छलके मुख पर,
कर्म करें सब मानवता हित, नहीं किसी से घात हो।
राम के जैसे मर्यादित हों, कूटनीतिक हों कृष्ण से,
एकलव्य से शिष्य बनें, प्रहलाद भक्त सी आस हो।
अनन्त काल से वीरों की, गाथाओं से शास्त्र भरे हैं,
शिराओं में प्रवाह रक्त का, शौर्य बन कर पास हो।
सृष्टि के संचालन कर्ता, सनातन में सबकी चर्चा,
विश्व गुरु भारत सदैव से, अध्यात्म पर विश्वास हो।
अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com