मां शारदे तुम्हें प्रणाम
रमाकांत सोनीसात सुरों की देवी सरस्वती हंस वाहिनी वर दे।
वीणा वादिनी कृपा कर शब्दों से झोली भर दे।
कलमकार साधक तेरे दुनिया में पाते सरनाम।
बुद्धिदाता वीणापाणि माला जपते सुबहो शाम।
मां शारदे तुम्हें प्रणाम
शब्द सुमन तेरे चरणों में आराधना सब गाते।
साधक शरण आपकी मां मंगल गान सुनाते।
छंद मुक्तक गीत गजलें मैया सुंदर सजा धाम।
दरबार में मोती बरसे माता शब्द सुधारस राम।
मां शारदे तुम्हें प्रणाम
पावन जोत जले मंदिर घट उजियारा वो पाता।
तेरी कृपा हो जाए मैया गुणवान वही हो जाता।
कंठों से झरे मधु वाणी व्योम गूंजे आठों याम।
वीणा की झंकार हृदय में मां सुरसत तेरा नाम।
मां शारदे तुम्हें प्रणाम
रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान रचना स्वरचित व मौलिक है
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