गणतंत्र का उजियारा
सत्येन्द्र कुमार पाठकनन्हा-मुन्ना बच्चा हूँ, प्यारा हिन्दुस्तानी हूँ,
देश की मिट्टी का मैं तो, सच्चा वरदानी हूँ।
छब्बीस जनवरी का, दिन बड़ा पावन है,
आजादी की धूप खिली, महका ये आँगन है।
वीरों ने लड़ी थी जंग, देश को बचाया था,
त्याग और बलिदान, अपना दिखाया था।
संविधान लागू हुआ, न्याय की डगर मिली,
लोकतंत्र की बगिया में, खुशहाली है खिली।
हाथों में तिरंगा ले, हम सब आयेंगे,
गणतंत्र का ये उत्सव, मिल के मनायेंगे।
पढ़ लिख कर हम, देश को सँवारेंगे,
भारत माँ की शान में, जीवन को वारेंगे।
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