प्यारे कृष्ण, बात सुनो!
सत्येन्द्र कुमार पाठक
रथ पर बैठे कृष्ण मुरारी, अर्जुन बोले— "
सुनो बिहारी! सामने खड़े दादा और गुरुवर,
कैसे बाण चलाऊँ उन पर?
आप मारते गंदे राक्षस,
पर ये तो हैं अच्छे मानस।
इन्होंने मुझको प्यार दिया है,
जीना और संस्कार दिया है।
मैं मरने से नहीं डरता हूँ,
दुख देने से डरता हूँ।
बाण छोड़ना काम है भारी,
सेवा करना सीख हमारी।
हाथ जोड़कर मैं ये पूछूँ,
किस रस्ते पर आगे बढ़ूँ?
मोह छोड़कर फर्ज निभाऊँ,
या अपनों पर प्यार लुटाऊँ?"
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