अयोध्या नगरी,शुभ सौम्य मनोहारी
कुमार महेंद्रपरिवेश छटा अलौकिक,
धर्म आस्था अरुणिम भोर ।
सनातन गौरव मान प्रतिष्ठा,
इतिहास आभा स्वर्णिम छोर ।
वैवस्वत मनु कर कमल स्थापना,
सुभग राजधानी इक्ष्वाकु वंशधारी ।
अयोध्या नगरी,शुभ सौम्य मनोहारी ।।
परा संज्ञा साकेत कोशल अवध,
प्रभु श्री राम अवतरण स्थली ।
दिव्य सरयू किनारे अवस्थिति,
पुलकित बौद्ध_जैन धर्म कली ।
अनुपमा सूर्य वंश साम्राज्य,
सिंहासन मर्यादा प्रजा सेवाकारी ।
अयोध्या नगरी,शुभ सौम्य मनोहारी ।।
वर्तमान स्वरूप मनमोहक,
अद्भुत श्री राम मंदिर छवि ।
रग रग राघव आदर्श संस्कार,
हिंदुत्व ओजस्विता सम रवि ।
कलयुग अंतर त्रेता अनुभूति,
दर्शन संग सुरभित जीवन फुलवारी ।
अयोध्या नगरी,शुभ सौम्य मनोहारी ।।
हनुमान गढ़ी कनक महल सह,
मनहर प्राचीन मंदिर झलक ।
अप्रतिम धर्म पथ राम पथ,
अष्ट प्रहर कृपा प्रसाद ललक ।
अनंत नमन पुनीत पावन धरा,
सर्वत्र श्री राम उद्घोष जयकारी ।
अयोध्या नगरी,शुभ सौम्य मनोहारी ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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