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आज कुछ लिखा है

आज कुछ लिखा है

आज कुछ लिखने का हमारा
बहुत ही मन हुआ।
इसलिए अपनी जिंदगी पर
ही कुछ हमने लिख दिया।
दिलकी गहराईयों को पहले
ध्यान से हमने पढ़ा।
और प्यार मोहब्बत पर
दिल से लिखा दिया।।


प्यार मोहब्बत का बंधन
अंतर आत्मा से होता है।
जो अपनी पत्नी को
बेपनाह मोहब्बत करता है।
वो ही इंसान एक दिन
ताजमहल बनवा देता है।।
और अपनी मोहब्बत को
अमर वो कर जाता है।।


निशानी प्यार मोहब्बत की
दुनिया में बहुतों ने छोड़ी है।
अमर उनकी ही हुई है
जिन्होंने इंसानियत जिंदा रखी है।
और अपने आप को हमेशा
मेहबूब के लिए समर्पित किया।
ऐसे ही प्रेमियों की यारों
मोहब्बत अमर होती है।।


जब भी लिखी पढ़ी जायेगी
कहानियाँ मोहब्बत की यारों।
तो उन सभी प्रेमियों को
दिलसे याद किया जायेगा।
भले ही उनकी मोहब्बत
परवान चढ़ न सकी हो।
परंतु संजय की ये रचना
दिल से पढ़ी जायेगी।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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