संस्कार लुप्त हो रहे
संजय जैनजाति धर्म के चक्कर में पड़कर
जीना कितना कठिन हुआ।
भाई चारे की परिभाषा को
क्यों हमने भूला दिया।
अमन चैन से रहने वाले
क्यों इंसानियत को खो रहे।
और अपने बसाये घरों को
खुद से ही हम मिटा रहे।।
अब दिल मेरा लगता नही
न ही मन लगता है।।
रात आते देख यारो
नींद कहा अब आता है।
दिन तो कैसे भी यारो
पूरा निकल जाता है।
पर शाम आते ही यारो
रात का डर सताता है।।
इस कलयुग में देखो यारो
राक्षस बनने लगे है घर में।
जिसके कारण सुरक्षित नही
अब नारी की जो इज्जत।
इसलिए तो टूट रहा है
सबका विश्वास देखो अब।
जिससे रिश्तों की मर्यादाएं
तार तार हो रही है।।
हवस का भूत देखो यारो
कैसे इंसानो पर चढ़ रहा है।
क्या बहिन बेटी बहू बच्चें
इनसे कोई बच पायेगा।
हैवानियत के भूत को देखो
क्यों इन पर इतना चढ़ा है।
जिसकी आग को रोक पाना
क्या कलयुग में सम्भव बचा है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews