धूल ने छीनी राह की रौशनी, रामानुजगंज में बस-टेलर की टक्कर से 20 से अधिक ज़िंदगियाँ घायल

- चीख-पुकार, खून से सनी सड़क और अस्पताल में कराहते लोग, सड़क निर्माण की लापरवाही बनी हादसे की वजह
रामानुजगंज | दिव्य रश्मि ब्यूरो रमेश कुमार चौबे की खबर |
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आगे चल रहे टेलर से उड़ रही घनी धूल ने बस चालक की आंखों से रास्ता छीन लिया। दृश्यता शून्य हो गई… और एक तेज़ धमाका हुआ। अम्बिका यात्री बस टेलर से जा टकराई। टक्कर इतनी भयावह थी कि यात्रियों के शरीर सीटों से उछल गए। किसी के सिर से खून बहने लगा, कोई दर्द से कराह उठा, तो किसी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। बस के भीतर चीख-पुकार गूंज उठी और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई।
बस में शासकीय आई.टी.आई. कॉलेज अरागाही के विद्यार्थी भी सवार थे, जिनके सपने किताबों और कक्षाओं से जुड़े थे, लेकिन उस पल वे ज़िंदगी और मौत के बीच झूलते नज़र आए। जैसे ही हादसे की खबर फैली, यात्रियों के परिजन बदहवास हालत में अपने-अपने साधनों से घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। किसी माँ की आंखों में आँसू थे, तो किसी पिता की सांसें अटकी हुई थीं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि रामानुजगंज से बलरामपुर के बीच सड़क निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही ने इस मार्ग को मौत का रास्ता बना दिया है। पानी का छिड़काव न होने से उड़ती धूल हर दिन किसी न किसी को निगल रही है। दोपहिया वाहन चालक रोज़ दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नींद अब तक नहीं टूटी।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और सभी घायलों को तत्काल रामानुजगंज के 100-बिस्तर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल के गलियारों में दर्द की आवाज़ें गूंज रही थीं। स्ट्रेचर पर पड़े लोग मदद की उम्मीद से डॉक्टरों की ओर देख रहे थे।
घायलों में विकासखंड शिक्षा कार्यालय रामचंद्रपुर में पदस्थ इंद्रमणि, जनपद कार्यालय के प्रियम सिंह, तहसील कार्यालय के असगर अंसारी, एसडीएम कार्यालय के जितेंद्र पाल, सूरजपुर जिले के सहायक प्राध्यापक विकास कुमार, महाविद्यालय की छात्रा ज्योति आयाम, अधिवक्ता रश्मि गुप्ता, छात्र अनीश अंसारी, छात्रा संजना मिस्त्री सहित कई अन्य यात्री शामिल हैं।
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों और समस्त मेडिकल स्टाफ ने मानवीय संवेदना और तत्परता का परिचय देते हुए घायलों का इलाज किया। निःशुल्क दवाएं, इंजेक्शन और जरूरी जांच कराई गईं। किसी ने कहा — “दर्द बहुत है, लेकिन ज़िंदा हैं… यही बड़ी बात है।”
घटना की जानकारी मिलते ही रामानुजगंज के पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं |
क्या उड़ती धूल पर अब भी पानी नहीं गिरेगा?
क्या किसी बड़ी जानहानि के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे? यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत है, जिसे आम लोग अपने खून और आंसुओं से चुका रहे हैं।
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