घर निकाला कर दिया अब पूछते क्या हाल है।

घर निकाला कर दिया अब पूछते क्या हाल है।

डॉ रामकृष्ण मिश्र

घर निकाला कर दिया अब पूछते क्या हाल है।

बे निवाला कर दिया अब पूछते क्या हाल है।।

आशियाने के लिए झेले न क्या- क्या क्या कहूँ।
तुमने ताले जड़ दिए अब पूछते क्या हाल है। ।

पसीने की कमाई थी कम सही खुश खूब थे।
चैन सारा छीन कर अब पूछते क्या हाल है।।

लोग अपने हैं सभी कैसे कहूँ सब गैर हैं।
स्वार्थ में नजरें बदल अब पूछते क्या हाल है।।

जिंदगी में हर समय होता कहाँ है एक सा।
दिन हमारे मंद हैं अब पूछते क्या हाल है।।

कब पलट जाएँ सितारे भाग्य के किसको पता।
जलने वाले मुझी से अब पूछते क्या हाल है।।
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रामकृष्ण

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