हुस्न पर क़सीदे जहां में ख़ूब हैं

हुस्न पर क़सीदे जहां में ख़ूब हैं,

वफ़ा के क़िस्से यहाँ पर खूब हैं।
इश्क़ में जां लुटाते आशिक सदा,
माशूक़ के क़िस्से यहाँ पर खूब हैं।

चढ़ती जवानी हुस्न की अच्छी लगे,
दिलकश अदा हुस्न की अच्छी लगे।
रंग रूप सूरत, दौलत पर मरते सभी,
अच्छी सीरत हुस्न की अच्छी लगे।

झुर्रियाँ चेहरे पर, इश्क़ की तब बात हो,
खुद को बिसरा दो, इश्क़ की तब बात हो।
चल सको न दो कदम, दर्द घुटनों में रहे,
सहारा दूजे का बने, इश्क़ की तब बात हो।

हम बनायें चाय, तुम बैठ कर पीती रहो,
बच्चों के संग खेल, ज़िन्दगी जीती रहो।
पोपले से मुख पर भी, हम कविता लिखें,
टूटे सिमटते रिश्ते, तुम प्यार से सीती रहो।

अ कीर्ति वर्द्धन
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