फेंककर हथियार
--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"
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फेंककर हथियार,
दो अब-
अपने लेखन को धारदार।।
मन में ज्ञान भरता प्रकाश है,
सारे दुर्गुण का करता नाश है,
दिखता जीवन का भविष्य तब-
अपने सारे तम को मार।१।
सच्चा जीवन साथी पुस्तक,
जिसके सम्मुख होते सब नत,
भाव अनोखा उठता उर में-
करता विघ्नों को पार।२।
पढ लो जितना पढ सकते हो,
चढ लो जितना चढ सकते हो,
सबका राह सजा दो सुंदर-
समझ जीवन दो चार।३।
जो जीवन में कलम उठाया,
नहीं किसीको वह भरमाया,
भय भ्रम को तो जीत लिया वो-
अपनेपन को वार।४।
जिसने पाया काला अक्षर,
वही हुआ स्वर्णिम हस्ताक्षर,
सहचर साक्षर का बन जा तु-
कर भव सागर को पार।५।
'मिश्रअणु' की सुंदर वाणी,
शिक्षा ही है जग कल्याणी,
जो भी सीखा उसने पाया-
हम का तम को मार।६।
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