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बेबस नारी.......

बेबस नारी.......

उसकी कोख से जन्मा
बेटा
भूख से तड़फ कर मर गया।
उस पर ही
अपने बेटे को खाने का
इल्जाम लग गया।
किसी ऩे नहीं सोचा
चार दिन से भूखी माँ
अपने बच्चे को
दूध कैसे पिलाएगी?
विडम्बना
अपने ही बच्चे की
हत्यारिन कही जायेगी।
किसी ऩे नहीं पूछा
उसके निकम्मे पति से
कब तक खटिया पर बैठा
तम्बाकू पीता रहेगा?
औरत की देह को
गीली माटी सा
रौंदता रहेगा?
अपनी बदकिस्मती का
ठीकरा भी
उस अबला के सर पर ही
फोड़ता रहेगा?
इस बार उसने
बेटी जनी।
ननद और सास की
भ्रकुटी फिर तनी।
निपूती होने का दाग
बेचारी पर लगा दिया
उस बेबस को
घर से बाहर
निकाल दिया।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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