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साहित्यिक पुस्तकों में आत्मीय विचारोंका समावेश

साहित्यिक पुस्तकों में आत्मीय विचारोंका समावेश 

मुजफ्फरपुर ।  मानवीय चेतना और आत्मीय विचारों का समावेश साहित्यिक पुस्तकों में समाहित है । विवाह पंचमी के अवसर पर  श्री रामभजन संकीर्तन आश्रम , रामभजन बाजार गोलारोड मुजफ्फरपुर का भगवान सूर्य परिसर में धर्म संसद मुजफ्फरपुर के संस्थापक एवं  पूर्व मंत्री केदारनाथ प्रसाद द्वारा लिखित पुस्तक  शिव महिमा ग्रंथ एवं फिर कब सुनाओगे का अवलोकन करते हुए जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि मानवीय संस्कृति की आत्मा पुस्तको में समाहित है । शिव महिमा ग्रंथ में मुजफ्फरपुर का गरीबनाथ धाम एवं भगवान शिव आराधना एवं उपासना की प्रमुखता दी गयी है । आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का रूप पुस्तक में उद्घृत है । फिर कब सुनाओगे (संस्मरण ) में  महाकवि आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री के प्रति साहित्यिक चिंतन प्रदर्शित किया गया है । अन्तरीय ज्ञान चक्षु से ज्ञान का प्रकाश से मानवीय चेतना जागृत होने के बाद महामानव हो जाता है । पुस्तके आध्यात्मिक मानवीय पथ प्रदर्शक का द्योतक है । राष्ट्र हित , जनहित संस्थाओं  के संरक्षक बिहार सरकार के पूर्व मंत्री केदारनाथ प्रसाद ने शिव महिमा ग्रंथ एवं फिर कब सुनाओगे पुस्तक में विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान प्रकट किए । ज्ञान का प्रकाश से मानवीय चेतना जागृत होने के बाद महामानव हो जाता है । पुस्तके आध्यात्मिक मानवीय पथ प्रदर्शक का द्योतक है ।राष्ट्र हित , जनहित संस्थाओं  के संरक्षक बिहार सरकार के पूर्व मंत्री केदारनाथ प्रसाद ने शिव महिमा ग्रंथ एवं फिर कब सुनाओगे पुस्तक में विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान प्रकट किए । इस अवसर पर अखिल भारतीय आदित्य परिषद के अध्यक्ष अंजनी कुमार पाठक द्वारा पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त किए ।
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