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बिहार की तरक्की पर सवाल

बिहार की तरक्की पर सवाल

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
नीति आयोग ने देश मंे गरीबी का आंकड़ा जारी किया है। इस आंकड़े में बिहार की स्थिति बहुत दयनीय है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 15 सालों का सुशासन राज्य के हालात बदलने मंे असफल रहा है। मुख्य विपक्षी नेता तेजस्वी कुमार ने तो कहा है कि तरक्की कैसे होती जब 15 साल में 30 हजार करोड़ के 76 घोटाले हुए हैं। लालू यादव का परिवार घोटालों के चलते
बदनाम जरूर रहा है लेकिन बाकी घोटाले कैसे हुए? नीति आयोग तो सही आंकड़े दे रहा है लेकिन नीतीश कुमार नीति आयोग से खुश नहीं बताये जाते। बिहार के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों पर भी नीतीश कुमार नाराज हुए थे। अब नीति आयोग ने गरीबी पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट मंे पांच सबसे ज्यादा गरीब राज्यों मंे चार भाजपा शासित प्रदेश हैं जिसके नेता डबल इंजन सरकार की दुहाई देते रहते हैं।
नीति आयोग ने देश की पहली बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट जारी की है, जिसके बाद सियासी पारा गर्म है। आयोग द्वारा जारी आंकड़े में गरीबी के मामले में जो पांच राज्य टॉप पर हैं, उनमें से चार बीजेपी शासित राज्य हैं। कहीं बीजेपी की अकेली पूर्ण बहुमत की सरकार है तो कहीं डेढ़ दशक पुरानी गठबंधन की सरकार है। गरीबों की आबादी के लिहाज से इनमें उत्तर प्रदेश सबसे टॉप पर है। नीति आयोग द्वारा जारी सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है। यहां नीतीश कुमार की अगुवाई में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन की डेढ़ दशक पुरानी सरकार है, जबकि दिसंबर 2019 से पहले बीजेपी शासित झारखंड में 42.16 प्रतिशत आबादी गरीब है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीबी में रह रही है।
बिहार की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 10.4 करोड़ है। इसकी करीब 52 फीसदी आबादी यानी 5.4 करोड़ आबादी गरीबी में जीवन बसर कर रही है। सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चैथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) पांचवें स्थान पर है। मध्य प्रदेश में भी साल 2003 से लगातार (दिसंबर 2018 से मार्च 2020 छोड़कर) बीजेपी की सरकार है और शिवराज सिंह चैहान 2005 से मुख्यमंत्री हैं। वहीं मेघालय में बीजेपी की गठबंधन सरकार है। इस सूचकांक में सीपीएम शासित केरल में 0.71 प्रतिशत, बीजेपी शासित गोवा में 3.76 प्रतिशत, सिक्किम में 3.82 प्रतिशत, तमिलनाडु में 4.89 प्रतिशत और पंजाब में 5.59 प्रतिशत आबादी गरीब है। ये राज्य पूरे देश में सबसे कम गरीब जनता वाले राज्यों में शामिल हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अब ये रुटीन बनता जा रहा है कि नीति आयोग की कोई रिपोर्ट आती है तो उनके राज्य की रैंकिंग नीचे से कुछ राज्यों में होती है। स्वास्थ्य सेवाओं की ताजा रैंकिंग में बिहार पूरे देश में प्रति एक लाख व्यक्ति पर 22 बेड के मानक पर मात्र छह बेड की सुविधा उपलब्ध कराने के आधार पर सबसे फिसड्डी साबित हुआ और नीतीश कुमार ने कहा कि इस अध्ययन को वो सही नहीं मानते। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास से मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हड्डी के उपचार के लिए जेपी अस्पताल स्थित है। वार्ड में एसी और पंखे दोनों लगे हैं लेकिन खराब हैं। मरीज और सम्बंधी एक बेड पर। बेड भी टूटा फूटा। और गर्मी से परेशान लोग घर से पंखा भी लेके आये हैं। हालांकि, सुविधाओं के अभाव में भी मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं है और अस्पताल में भले पानी की मशीन खराब पड़ी है लेकिन सीटी स्कैन की मशीन काम कर रही है और प्रबंधन का मानना है कि ऑपरेशन के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर सुभाष चंद्रा कहते हैं, हमारे यहां दो ही ओटी हैं जिसके कारण मरीजों का वेटिंग टाइम बढ़ जाता है। राजधानी पटना के बाहर नवादा के सदर अस्पताल, जो हमेशा कुछ ना कुछ वायरल वीडियो के कारण चर्चा में रहता है, वहां भी वार्ड के अंदर स्थिति बदहाल है। नीति आयोग ने एक रिपोर्ट में माना था कि बिहार की स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत ठीक नहीं और राज्य में प्रति एक लाख व्यक्ति पर मात्र छह बेड हैं जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ये बीस बेड प्रति एक लाख की जनसंख्या हैं। लेकिन नीतीश कुमार इसे नहीं मानते।
बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर विपक्ष गरीबी को लेकर नीति आयोग की रिपोर्ट पर लगातार हमलावर है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा करीब 52 फीसदी गरीब लोग बिहार में रहते हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट पर नीतीश कुमार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पत्रकारों ने सीएम से नीति आयोग की रिपोर्ट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि कौन सी नीति आयोग की रिपोर्ट, मैंने देखी नहीं है, देख लेंगे तभी कोई कमेंट करेंगे। इस पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर इसका एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है, माने... बहुते ही भोले हैं। कहीं कुछ देखते कहां हैं? इतना अभिनय करने के पश्चात भी क्या इनके चेहरे के भाव से लगता है कि वो वास्तव में इसके बारे में जानते ही नहीं है? वो अच्छे से जानते है कि जब यह खबर बासी हो जाएगी तो कौन पूछेगा? बता दें कि हाल ही में तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के 15 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर कई सवाल किए थे। उन्होंने सवाल किया था नीति आयोग के सभी सूचकांकों पर बिहार साल दर साल क्यों पिछड़ता जा रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य चीजों में बिहार अंतिम पायदान पर क्यों और कैसे पहुंचा। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने हुए 15 साल हो गए हैं। इसको लेकर जदयू कार्यकर्ता जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर है। इस बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी ने बयान दिया है कि विगत 16 वर्षों से सभी क्षेत्रों में राज्य को फिसड्डी साबित कर देश में बिहार को सबसे निचले पायदान पर पहुंचाने वाले मुख्यमंत्री आज अपनी नाकामयाबी का जश्न-ए-फेल्योर मना रहे हैं। नीतीश कुमार बताएं कि विगत 16 वर्षों में बिहार में 30 हजार करोड़ के 76 घोटाले क्यों हुए।
नीतीश कुमार का बिहार की 60 फीसदी आबादी अर्थात युवाओं को जवाब देना ही होगा। दें कि उनके 16 वर्षों के शासन के बाद भी आज बिहार पूरे देश में गरीबी और बेरोजगारी का मुख्य केंद्र क्यों बना हुआ है? क्यों युवाओं को अपनी योग्यता और शिक्षा के नीचे जाकर दूसरे प्रदेशों में अपमानित होकर काम ढूंढने पर विवश होना पड़ता है? (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

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