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हमने दुनिया को सत्य दिया: भागवत

हमने दुनिया को सत्य दिया: भागवत

(मनीषा स्वामी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में  घोष सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इसके समापन समारेाह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की संस्कृति के बारे में मुख्य रूप से चर्चा की। उन्हांेने कहा कि हजारों हजार वर्ष पूर्व भी हमारे पूर्वज यहां से पूरी दुनिया मंे गये और वहां उन्हांेने किसी को बदलने की कोशिश नहीं की बल्कि सत्य का ज्ञान कराया। इसीलिए हमारे देश से दुश्मनी निभाने वाले चीन के लोग भी यह कहते हुए नहीं सकुचाते कि भारत ने 2000 वर्ष पूर्व अपनी जिस संस्कृति का प्रभाव जमाया था, उसकी याद सुखद है। श्री भागवत का संकेत बुद्ध के बेटे द्वारा चीन मंे बौद्ध धर्म के प्रचार से है। हमारे देश का इतिहास यही रहा कि हमने किसी से कुछ भी छीना नहीं। भगवान राम ने बालि का वध किया तो किष्किंधा का नरेश उसके भाई सुग्रीव को बनाया और लंका में ंरावण का वध किया तो उसके भाई विभीषण को राजा बनाया। इन दोनों स्थानों पर भगवान राम ने सत्य की शिक्षा दी। बालि से कहा ‘अनुज वधू, भगिनी सुत नारी, सुनु सठ ये कन्या समचारी।’ इसी प्रकार रावण को यह सत्य सिखाया कि अहंकार नहीं करना चाहिए। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने घोष शिविर में कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है, असत्य की नहीं। श्री भागवत ने पहले भी कहा था कि हम सभी भारतीयों का डीएनए एक है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के मदकू द्वीप में आयोजित घोष शिविर के समापन समारोह में कहा, ‘‘हम सभी को अपने पूर्वजों के उपदेशों को स्मरण करना है। हमारे पूर्वजों के पुण्य का स्मरण करा देने वाले इस क्षेत्र में संकल्प लेना है कि संपूर्ण विश्व को शांति सुख प्रदान करा देने वाला विश्वगुरु भारत गढ़ने के लिए हम सुर में सुर मिलाकर एक ताल में कदम से कदम मिलाकर सौहार्द और समन्वय के साथ आगे बढ़ेंगे। मुंगेली जिले से होकर बहने वाली शिवनाथ नदी में स्थित मदकू द्वीप में 16 नवंबर से 19 नवंबर तक घोष शिविर का आयोजन किया गया था।
उन्होंने इस अवसर पर कहा, सत्यमेव जयते नानृतम्। सत्य की ही जीत होती है, असत्य की नहीं। झूठ कितनी भी कोशिश कर लेकिन झूठ कभी विजयी नहीं होता है। भागवत ने कहा, ‘‘यहां विविधता में एकता है और एकता में विविधता है। भारत ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा। पूर्व में हमारे पूर्वज यहां से पूरी दुनिया में गए और उन्होंने वहां के देशों को अपना धर्म (सत्य) दिया लेकिन हमने कभी किसी को बदला नहीं, जो जिसके पास था उसे उसके पास ही रहने दिया। हमने उन्हें ज्ञान दिया, विज्ञान दिया, गणित और आयुर्वेद दिया तथा उन्हें सभ्यता सिखाई। इसलिए हमारे साथ लड़ने वाले चीन के लोग भी यह कहते हुए नहीं सकुचाते कि भारत ने 2000 वर्ष पूर्व ही चीन पर अपनी संस्कृति का प्रभाव जमाया था, क्योंकि उस प्रभाव की याद ही सुखद है दुखद नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया उसी को पीटती है जो दुर्बल है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि दुर्बलता ही पाप है। बलशाली का मतलब है संगठित होना। अकेला व्यक्ति बलशाली नहीं हो सकता है। कलयुग में संगठन ही शक्ति मानी जाती है। हम सभी को साथ लेकर चलेंगे, हमें किसी को बदलने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने घोष प्रदर्शन को लेकर कहा, ‘‘आपने अभी देखा होगा कि इस शिविर में सभी अलग-अलग वाद्य यंत्र बजा रहे थे। वाद्य यंत्र बजाने वाले लोग भी अलग थे लेकिन सभी का सुर मिल रहा था। इस सुर ने हमें बांधकर रखा है। इसी तरह हम अलग-अलग भाषा, अलग-अलग प्रांत से हैं, लेकिन हमारा मूल एक ही है। यह हमारे देश का सुर है और यह हमारी ताकत भी है।
इससे पूर्व इसी वर्ष 4 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और मुसलमानों को ‘डर के इस चक्र मेंश् नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है। वह राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा यहां हिन्दुस्तानी प्रथम, हिन्दुस्तान प्रथम विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों में इस आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता कि उनका पूजा करने का तरीका क्या है। आरएसएस प्रमुख ने लिंचिंग (पीटकर मार डालने) की घटनाओं में शामिल लोगों पर हमला बोलते हुए कहा, ‘वे हिन्दुत्व के खिलाफ हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोगों के खिलाफ लिंचिंग के कुछ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। भागवत ने कहा, ‘भय के इस चक्र में न फंसें कि भारत में इस्लाम खतरे में है। उन्होंने कहा कि देश में एकता के बिना विकास संभव नहीं है। आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि एकता का आधार राष्ट्रवाद और पूर्वजों का गौरव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान ‘संवाद है, न कि ‘विसंवाद। भागवत ने कहा, ‘हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात भ्रामक है क्योंकि वे अलग नहीं, बल्कि एक हैं। सभी भारतीयों का डीएनए एक है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। उन्होंने कहा, ‘हम एक लोकतंत्र में हैं। यहां हिन्दुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता। यहां केवल भारतीयों का वर्चस्व हो सकता है। भागवत ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि वह न तो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही वोट बैंक की राजनीति के लिए। उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति में है और न ही यह कोई छवि बनाए रखने की चिंता करता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘यह (संघ) राष्ट्र को सशक्त बनाने और समाज में सभी लोगों के कल्याण के लिए अपना कार्य जारी रखता है।
हिन्दुस्तान निश्चित रूप से एक खूबसूरत देश है। इस खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कई लोग अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां की विविधताएं ही लोगों को एक धागे में पिरो कर रखती हैं। अभी हाल ही में एक खबर सुकून देगी। पश्चिम बंगाल के रहने वाले गरीब मुस्लिम शख्स ने काली मंदिर बनाने के लिए अपनी जमीन दान दे दी। इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा हो रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के भीमपुर गांव में करीब 450 लोग रहते हैं, जिसमें 150 लोग मुस्लिम परिवार के हैं। गांव में स्थित एक खाली जगह में काली मां की पूजा प्रत्येक साल होती है। चूंकि यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा के अंतर्गत आता है। ऐसे में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से इजाजत लेनी पड़ती है। इस बार बीएसएफ ने इजाजत नहीं दी। इस समस्या का हल गांव के मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति हनन मंडल ने निकाला। उन्होंने अपनी खाली पड़ी जमीन को हिन्दू समुदाय को दे दी, ताकि काली पूजा आसानी से हो सके। रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी नजीब जंग ने भी कहा था कि सबका खून हिंदुस्तान की मिट्टी में है। भागवत के संबोधन को लेकर उन्होंने कहा, भागवतजी ने अपने विचार साफ किए, उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया है। मुझे 1985-86 याद आता है। जहां दिमाग है उसे खोला जाए। भागवत ने कहा, सब एक ही डीएनए से आते हैं, यह राजनीतिक बयान नहीं है, हिंदुत्व का बयान नहीं है। हिंदु का बयान है, इस बयान की हमें जरूरत थी।
हनन मंडल के इस कार्य से पूरे गांव में खुशी की लहर फल गयी थी।। हिन्दू समुदाय के लोग कहते हैं कि यही हमारी एकता है। जो नेता लोग हमें बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए ये एक मिसाल है। देखा जाए तो ये एक वाकई में धार्मिक मिसाल है। हिंदुस्तान का एकजुट होना जरूरी है, हमारा एकजुट होना जरूरी है। (हिफी)

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