किनारे सदा मिला करते हैं
कौन कहता है
किनारे मिलते नहीं?
जरा दूर तक निगाह डालो
फिर
अपने विचारों को खंगालो
और देखो
क्या किनारे मिलते नहीं?
बस
नजरिए का फर्क है
किनारों के मिलने
और
नहीं मिलने में।
लोग
प्यार में अक्सर
कहा करते हैं
दो शरीर और
एक जान बताया करते हैं।
फिर
दो किनारों के बीच में
एक जान
रेत और पानी है
जो किनारों के मिलन की
जिंदा निशानी है।
सृष्टि
सदैव ही
दो किनारों पर चलती है
धरा और आकाश
सृष्टि के दो किनारे हैं
जिनका मिलन
क्षितिज पर होता है
जिसका साक्षी
स्वयं
परमपिता होता है।
सुख-दुख भी
जीवन में दो किनारे हैं
संवेदनाएं
जिसके रक्त धारे हैं।
जब जब
किनारे मिल जाते हैं
क्षितिज का जन्म हो जाता है
नदियों का नाम
समुद्र बन जाता है।
कौन कहता है
किनारे मिलते नहीं
नजरिया बदल कर देखो
सब एक नजर आता है।
जो लोग
धरा पर चलते हैं
क्या कुछ पल भी
संग साथ चला करते हैं?
इन किनारों को देखो
क्षितिज पर मिलते हैं
फिर भी
युगो युगो से
संग साथ जिया करते हैं
कोई उलाहना
कोई वेदना
कभी नहीं कहते हैं
बस
साथ साथ चलने की
दुआ किया करते हैं।
किनारे
सदा मिला करते हैं।
कीर्ति
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews