Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

तालिबान

तालिबान

     ---:भारतका एक ब्राह्मण.
        संजय कुमार मिश्र "अणु"
मजहबी शिक्षा जो पाए,
वही है तालिबानी।
कट्टरपंथी बनों पंथ हित,
कहता किताब आसमानी।।
इसका जन्मदाता रहा है,
पूर्वी पाकिस्तान।
संरक्षण खुब द्दिया इसे-
अरब,इरान,अफगान।।
मजहबी तालीम दे देकर,
कट्टरता का पाठ पढाया।
राजनीति ने अपने हित में-
करो जेहाद फरमाया।।
दे हथियार नवजवानों को-
कलम-किताब छुडवाया।
मजहब के खिलाफ जो हो,
काफिर है वह समझाया।।
काफिरों को मारो काटो-
तब तुम्हें मिलेगा जन्नत।
बस मजहब की कही करो-
रोजा,नमाज, बुर्का,सुन्नत।।
लेकिन धर्म के आड पेच में-
आदमी आदमी का संहार किया।
सत्ता का संरक्षण पाकर-
उन्मादी जयकार किया।।
जो कल इसको पाला पोषा-
आज वही पछताता है।
बना बर्बर,कट्टर, धर्मांध-
अब चरमपंथ बतलाता है।।
देश छोड सब भाग रहे हैं-
है ऐसा कुछ माहौल बना।
आदमी की आदमियत की-
देखो कैसा माखौल बना।।
आदमी खून का प्यासा था-
आदमी खून का प्यासा है।
आदमी आदमी को मार रहा-
आदमी अब बना तमाशा है।।
इंसान देखकर हंसता है,
मानव का मन चित्कार रहा।
कैसा इसको तालीम मिला जो-
आदमी आदमी को मार रहा।।
आदमी और.इंसान हमेशा-
है रहा करवाते रक्तपात।
मानव की बात न मानोगे-
होता रहेगा ये बज्रपात।।
इरान,अफगान ये पाकिस्तान,
बनाया अपनों को तालिबान।
अपने से अपनों को मार रहा-
ले हथियार पढ कर कुरान।।
अपनी मनमर्जी थोप रहा-
और कहता है इसको शरीयत।
आखिर अपनों को मार काट-
कैसे पा सकता है जन्नत।।
है रोज-रोज वह काट रहा-
खुद से खुद की आबादी को।
है सारी दुनिया देख रही-
इस आदमी की बर्बादी को।।
आखिर इसका विरोध क्यों नहीं,
कर रहा एक भी मुसलमान।
जिसने मजहब को समझा है-
पढ कर के हदीस कुरान।।
----------------------------------------
वलिदाद,अरवल(बिहार)804402.
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ