फांसी से पूर्व राम प्रसाद बिस्मिल की अपनी आत्मकथा के पश्चात अंतिम रचना
सोचिए फांसी से पूर्व अच्छे-अच्छे की मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है लेकिन बिस्मिल देशभक्ति ओज वीर रस से युक्त रचनाएं रच रहे हैं| इससे यह पता चलता है बिस्मिल कितने परिपक्व मानसिक तौर पर मजबूत थे| रामप्रसाद बिस्मिल महान क्रांतिकारी होने के साथ-साथ उच्च कोटि के साहित्यकार शायर भी थे उनकी रचनाएं मातृभूमि को समर्पित होती थी ,देशभक्ति से सारोबार| बिस्मिल की असंख्य साहित्यिक रचनाएं आज नष्ट हो गई हैं जो बहुत बड़ी क्षति है| बिस्मिल का शायरी लेखन उन्हें अन्य क्रांतिकारियों से अलग करता है... चंद्रशेखर आजाद से लेकर भगत सिंह असंख्य वीर क्रांतिकारियों ने बिस्मिल की रचनाओं का पाठ किया है |
गोरखपुर की जेल में फांसी से कुछ घंटे पूर्व उन्होंने ऐसी एक रचना लिखी जिसे उन्होंने भारत विनय नाम दिया|
मरने से पहले कैसे एक अमर क्रांतिकारी देश भारत माता से विदा लेता है रचना इस प्रकार है|
हाय! जननी जन्मभूमि छोड़कर जाते हैं हम |
वश नहीं चलता है रह-रह कर पछताते हैं हम |
स्वर्ग के सुख से भी ज्यादा सुख मिला हमको यहां इसलिए तजते इसे हर बार शरमाते हैं हम |
ऐ नदी, नालों, दरख्तो , ये मेरा कसूर
माफ करना जोड़ कर ,तुमसे फरमाते हैं हम|
मातृभूमि! प्राणप्यारी! बहुत दुख तुमको दिया ,
कर क्षमा अपराध बारंबार सिर नवाते हैं हम |
कुछ भलाई भी ना हम तुम सब की खातिर कर सके
हो गए बलिदान बस संतोष यू पाते हैं हम |
मां! तुझे इस जन्म में कुछ सुख ना दे पाए कभी
फिर जन्म लेंगे यही कौल कर जाते हैं हम |
शीघ्र करके यत्न मेरे देश! फिर आकर तुझे
दुश्मनों से छीन लेंगे यह कसम खाते हैं हम|
आज अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जी की जन्म जयंती है महान क्रांतिकारी को कोटि-कोटि नमन!
आर्य सागर खारी
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