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एक पैगाम लिखना

एक पैगाम लिखना

 स्नेह भाव जागृत हो जाए जन जन में, 
मानस के चितवन गुलजार हो जायेंगे, 
प्रीत की रीत पुष्पित हो हर आंगन में, 
कागज पर नहीं, दिल में मेरा नाम लिखना। 
हम रहें या ना रहें, एक पैगाम लिखना।। 

मेरे एक प्रयास से सब में चेतना आ जाए, 
गृष्म ऋतु में जब बसंत का बहार आ जाए, 
चहुँओर खुशियों की छटा जब छा जाए, 
दिल से ना सही आशीष बेनाम लिखना। 
हम रहें या ना रहें, एक पैगाम लिखना।। 

किए का सत् फल मिले या कभी ना मिले, 
मेरे प्रति मोहब्बत का गुल खिले या ना खिले, 
बदनामी की दाग धुले या कभी ना धुले, 
कसूर क्या है मेरा ओ इल्ज़ाम लिखना। 
हम रहें या ना रहें, एक पैगाम लिखना।।

कहते हैं कुछ लोग, अपनी वफा बिकाऊ है, 
सत् कर्म नहीं प्रिये कुकर्म ही टिकाऊ है, 
स्नेह बंजर है पर ईर्ष्या डाह उपजाऊ है, 
खुदा कसम शिकवे शिकायत तमाम लिखना। 
हम रहें या ना रहें, एक पैगाम लिखना।। 


 डॉ रवि शंकर मिश्र "राकेश "
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