मिल जाएगा मन भरकर
---:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र 'अणु'
तुम कोमल बांहों में सोई थी।
तब सारी दुनिया खोई थी।।
जब सम्मुख आई सच्चाई-
खुद को निहार कर रोई थी।।
उस समय कौन था साथ दिया,
क्या इतनी सी बात बताओगी।
या उधेड़बुन में डाल मुझे यूं-
बस सारी रात जाओगी।।
जो एक बार भी पुछा नहीं,
आकर तेरा कुछ कुशल क्षेम।
कैसे करती विश्वास कहो तुम-
कि खुलकर करेगा तुम्हें प्रेम।।
ये प्यार की बात अधुरी हैं,
जब दोनों के तरफ मजबुरी है।।
तब खुद निर्णय कर कहो मुझे-
जो जीवन के लिए जरूरी है।।
जिंदगी कटी है तो रोकर,
क्या रहना होगा सब खोकर।
अब अपने का विश्वास करो-
मारो ममता को अब ठोकर।।
है 'मिश्र अणु' कहता तुमसे,
आकर बन जा मेरा सहचर।
हो विकल बने जो खोज रहे-
वह मिल जाऐगा मन भरकर।।
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