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राम जन्मभूमि आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर है तो सीता जन्मभूमि को भी यह सम्मान मिलना चाहिए, सार्थक पहल की है जरूरत

जिला स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को कला संगम के तत्वावधान में मुख्यालय डुमरा स्थित जायसवाल भवन परिसर में विचार गोष्ठी व भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। फिल्म निर्माता डॉ. शंकर सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकाराें एवं बुद्धिजीवियों ने संयुक्त रूप से जिले के विकास कार्यों पर चर्चा की। सीतामढ़ी जिला 11 दिसंबर 1972 को मुजफ्फरपुर से अलग हुआ था।

इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से स्थापना दिवस समारोह का आयोजन नहीं किया जा रहा है। । पिछले 49 वर्षाें में जिले का जो विकास होनी चाहिए, उससे हम काफी पीछे है। जिले के विकास के लिए हम सभी जिलेवासियों को एक साथ आगे आना होगा एवं दृढ़ संकल्पित होना होगा। कहा कि राम जन्म भूमि आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर है तो सीता जन्मभूमि को भी यह मकाम मिलना चाहिए। इसके लिए सार्थक पहल करने ही जरूरत है।

धरती पे उतरा खुद आकाश है, जहां कण-कण में बिखरा इतिहास है...

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आगाज गीतकार गीतेश की रचना “जिस धरती पे उतरा खुद आकाश है, जहां के कण-कण में बिखरा इतिहास है, जगत जननी जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी परम पुनीत और खास है... से हुआ। गीत, गजल, कविता व शेरो शायरी का दौर चलता रहा। मौके पर सरोज कुमार, अलाउद्दीन, इमाम अली, रामबाबू सिंह, गुफरान रासिद, डॉ. शंकर सिन्हा, प्रियांश, आर्या राज, सचिन सूर्य, अंश कुमार, शशि रंजन, रवि आदि ने अपनी रचना से महफिल को चार चांद लगा दिया।



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डुमरा में आयाेजित कवि सम्मेलन में शामिल कवि व अन्य।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/sitamarhi/news/ram-janmabhoomi-is-on-the-international-stage-today-so-sita-janmabhoomi-should-also-get-this-honor-meaningful-initiative-is-needed-128001529.html

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