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पुराने ज़ख्म जो हैं तूने कुरेदे ,

पुराने ज़ख्म जो हैं तूने कुरेदे 

पुराने ज़ख्म जो हैं तूने कुरेदे ,
न कर दवा पर दुआयें तो दे दे ,
जीते रहेंगे तेरा दर्द लेकर ,
जीने के लेकिन बहाने तो दे दे ,

जल उठे हैं चराग बिना शाम के ,
कर लेते हैं याद बिना काम के ,
क्या हुआ क्या नही ये पता ही नही ,
चढ़ रहा क्यों खुमार बिना जाम के ।

कभी बादलों से बरसते नयन ,
कभी झूमता मन होके मगन ,
कभी धूप है तो कभी छाँव है ,
मीरा सी लगे मुझे ये लगन ।

आते हैं जीवन में मझधार कैसे ,
करे किससे कोई फरियाद कैसे ,
डूबती है कभी उतराती है नय्या ,
साहिल को मिले कोई पतवार कैसे ।
नीलू मिश्रा
कानपुर उत्तर प्रदेश 
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