सरैया के एक गांव में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म में मंगलवार काे सरैया पुलिस ने काेर्ट में आराेपी युवक और बच्ची का कच्छा 7 दिन बाद न्यायालय में प्रस्तुत करने का काेई औचित्य नहीं बनता है। पुलिस ने विशेष पाॅक्साे काेर्ट पश्चिमी से पेश दाेनाें कच्छे की एफएसएल से जांच कराने का आग्रह किया। अधिवक्ता डाॅ. संगीता शाही ने कहा, सामान्य ताैर पर 48 घंटे के अंदर सीमन की जांच आसानी से संभव है।
विलंब हाेने पर कई बार स्पष्ट रिपाेर्ट आने में परेशानी हाेती है। जब पुलिस ने वारदात के दिन ही कच्छा जब्त किया था ताे उसे 7 दिन बाद न्यायालय में प्रस्तुत करने का काेई औचित्य नहीं बनता है। विशेष पाॅक्साे काेर्ट ने पुलिस की ओर से पेश किए गए कच्छे काे गन्नीपुर एफएसएल यूनिट से जांच कराने का आदेश दिया है।
दाेनाें प्रदर्श काे सील कर पुलिस के द्वारा एफएसएल यूनिट भेजा जाएगा। पुलिस ने बच्ची के साथ ही उसकी मां का भी मंगलवार काे काेर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया है। संबंध में बच्ची की मां ने काेर्ट काे विस्तार से जानकारी दी है। हालांकि, बयान की काॅपी काे न्यायिक दंडाधिकारी ने सीलबंद रखा है।
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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/7-days-after-the-misdemeanor-there-is-no-justification-for-presenting-the-briefs-in-the-court-sangeeta-128017844.html

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