कोरोना मरीजों के इलाज में प्राइवेट हॉस्पिटल की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने अधिकतम 18 हजार रुपए प्रतिदिन खर्च तय किया है। इसके बावजूद कई निजी अस्पताल मरीजों से मनमाना पैसे वसूल रहे हैं। जितना बड़ा अस्पताल, उतना अधिक इलाज का खर्च। कई अस्पताल ताे
इलाज से पहले ही मरीज से सिक्योरिटी मनी के रूप में 20 से 50 हजार रुपए जमा करवाए रहे हैं। विडंबना यह है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए जिला प्रशासन ने जिन अस्पतालों को चिह्नित किया है, उनमें तीन के पास इलाज की कोई सुविधा नहीं है। जबकि, एक हॉस्पिटल में केवल तीन बेड हैं और एक में सिटी स्कैन की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए लिस्ट से बाहर प्राइवेट हॉस्पिटलों को चुनना पड़ रहा है। लिस्ट से बाहर हॉस्पिटलों के बारे में जानकारी इसमें शामिल अस्पातल के कर्मचारी ही दे रहे हैं।
- पारस हॉस्पिटल, पटना: यहां कोरोना संक्रमित के इलाज के लिए हर दिन 40 हजार रुपए से अधिक का खर्च है। साथ ही आईसीयू में भर्ती के लिए 1.30 लाख रुपए अलग से देने होंगे। 50 हजार रुपए सिक्योरिटी मनी है। जांच, दवा और भोजन के खर्च के लिए अलग से पैसे देने होंगे।
- सहयोग हॉस्पिटल, पाटलिपुत्र: 20 हजार रुपए हर दिन का खर्च है। इसके लिए हर तीन दिन बाद 50 हजार रुपए जमा करने होंगे। दवा, जांच और दूसरी चीजों का खर्च अलग से देना होगा।
- नेस्तिवा हॉस्पिटल, यारपुर, गर्दनीबाग: दो दिन का खर्च 50 हजार रुपए। दवा के लिए अलग से पैसे देने हाेंगे। इसके साथ बाहर होने वाली जांच का पैसा मरीज को अलग से देना होगा।
- मेडिपार्क हॉस्पिटल, पाटलिपुत्र: कोरोना संक्रमित के इलाज के लिए दो दिन का खर्च 50 हजार रुपए है। इसके बाद फिर से पैसे जमा करने होंगे।
- गेटवेल हॉस्पिटल, बेली रोड, शेखपुरा: कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए नर्सिंग होम में सुविधा नहीं है। सैलरी के आधार पर डॉक्टर नियुक्ति नहीं हैं। कोविड की वजह से ज्यादातर डॉक्टराें ने यहां आना ही छोड़ दिया है।
- श्री राम ट्रस्ट हॉस्पिटल, जक्कनपुर: कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
- राई नर्सिंग होम, बेली रोड, समनपुरा: कोविड मरीजों के इलाज के लिए सुविधा नहीं है। जो डॉक्टर मरीजों का इलाज करते थे, वे ही संक्रमित हो गए हैं। इसकी वजह से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
- मेडिजोन हॉस्पिटल: अस्पताल में केवल तीन बेड हैं। ऐसे में मरीज को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालाें में भर्ती करना होगा। हॉस्पिटल के कर्मचारी ने ही इसकी जानकारी देते हुए ओपोल एशिया हॉस्पिटल में दिखवाने के लिए कहा।
किस अस्पताल में कितनी फीस जायज
कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए सरकार ने बिहार को तीन श्रेणियों में बांटा है। प्रथम श्रेणी में पटना को रखा गया है। पटना में मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज के लिए प्रतिदिन अधिकतम 10 हजार रुपए, आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए 15,000 और आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ 18 हजार रुपए की सीमा निर्धारित की गई है।
वहीं, पटना जिला स्थित गैर मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों को अधिकतम 8000 रुपए प्रतिदिन का भुगतान करना हाेगा। आईसीयू के लिए 13,000 और वेंटिलेटर के साथ 15,000 रुपए प्रतिदिन का खर्च निर्धारित किया गया है। विभाग द्वारा तय राशि में पीपीई किट का मूल्य भी शामिल है।
बी श्रेणी में भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और पूर्णिया के मान्यता प्राप्त अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड के लिए प्रतिदिन 8000, आईसीयू के लिए 12,000 और आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ 14,400 रुपए अधिकतम प्रतिदिन शुल्क तय किया गया है। गैर मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए 6,400 रुपए, आईसीयू के लिए 10,400 और आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ 12,000 रुपए अधिकतम शुल्क तय किया गया है।
सी श्रेणी में बिहार के शेष जिलों को शामिल किया गया है। यहां मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए अधिकतम प्रतिदिन 6000 रुपए, आईसीयू के लिए 9000 रुपए, आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ 10,800 रुपए शुल्क तय किया गया है। इन जिलों के गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए 4,800 रुपए, आईसीयू के लिए 7800 और आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ इलाज के लिए 9000 रुपए प्रतिदिन अधिकतम शुल्क का तय किया गया है।
सिविल सर्जन बोले, नहीं मिली कोई शिकायत
कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए अधिकतम रेट 18 हजार फिक्स कर दिया गया है। इसके तहत पीपीई किट, आवश्यक दवाएं, जांच, भोजन, रूटिंग चेकअप, ऑक्सीजन सहित दूसरी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई हॉस्पिटल अधिक पैसे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अबतक प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा अधिक पैसे की मांग की किसी ने भी शिकायत नहीं की है। -डॉ. आरके चौधरी, सिविल सर्जन, पटना
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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/private-hospitals-charging-double-the-fixed-rate-for-the-treatment-of-carena-patients-seeking-separate-money-for-drug-testing-127676875.html

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