Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

हवा का रुख बदल रहा है

हवा का रुख बदल रहा है

मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
हवा का रुख बदल रहा है
संभल कर चलना पथिक
तेज आँधियों में कहीं 
उड़ न जायें सपने तेरे।
कैद करने को आतुर हैं
मछुआरे नदी के तीर पर
बंसी में चेरा लगाये जोह रहे हैं बाट
तेरे आने की पानी की सतह पर।
पाँव जमाये रखना 
तब तक जमीं पर तुम
जब तक तूफान का दौर
थम न जाये।
अमावश की रात से
पूनम की चाँदनी तक
पहुँचने में वक्त लगता है
धीरज की लौ कहीं बूझने न पाये।
.....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ