सदर अस्पताल की विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) का वार्ड बीते तीन दिनों से बंद है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बिजली आपूर्ति बाधित रहने एवं जेनरेटर में डीजल के अभाव में एसएनसीयू में इलाज बंद है। एसएनसीयू में पांच नवजात भर्ती थे। व्यवस्था के अभाव में सोमवार को भर्ती पांच नवजातों में से तीन को घर भेजकर दो नवजात को रेफर कर दिया गया। उसके बाद से बच्चों को भर्ती नहीं लिया जा रहा। इससे उन बच्चों के परिजन परेशान हैं जिन्हें आईसीयू पर नवजात को रखने की जरूरत है। एसएनसीयू में नवजात को भर्ती कराने के लिए आ रहे लोगों को स्वास्थ्यकर्मी मजबूरी बताकर वापस भेज रहे हैं।
एसएनसीयू से रेफर बच्चों के परिजन बेहतर इलाज कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। संपन्न लोग तो निजी क्लीनिक में नवजात को भर्ती करा दिया वहीं गरीब अपने घरों में भगवान के भरोसे नवजात का उपचार करा रहे है। कई गरीब परिवार अस्पताल से गुहार लगा रहे हैं। उनके लिए इलाज कराना काफी मुश्किल हो गया है। सदर अस्पताल के एसएनसीयू की ऐसी स्थिति इसलिए है कि रविवार से ही तकनीकी कारण से बिजली की आपूर्ति ठप है।
जेनरेटर सुविधा भी बंद है। बताया जाता है कि जेनरेटर में डीजल की आपूर्ति करने के लिए पैसे की व्यवस्था नहीं हैं। एसएनसीयू वार्ड में ऐसे नवजात बच्चों को रखा जाता है जो कुपोषित होते हैं अथवा जिन्हें गंभीर बीमारियां रहती हैं। चिकित्सक की मानें तो हर चार में एक बच्चा अंडरवेट जन्म लेता है। किसी नवजात को पीलिया तो किसी को अन्य गंभीर बीमारी की वजह से भर्ती किया जाता है। जन्म के समय नहीं रोने वाले, श्वास में तकलीफ व अविकसित नवजातों को ही एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है।
डीजल नहीं रहने का बना रहे बहाना
एसएनसीयू में रविवार की दोपहर से बिजली की आपूर्ति बंद हो जाने के बाद रात में जेनरेटर चला कर बच्चों को रखा गया, लेकिन सोमवार की डीजल नहीं रहने का बहाना बना जेनरेटर बंद कर दिया गया। इसके बाद भर्ती बच्चों में निस्ता गांव के सुलो कुमारी के नवजात और हलसी ककरौड़ी गांव के चंचल कुमारी के नवजात को रेफर किया गया। वहीं चोटहा गांव के सोपी देवी, पतनेर गांव के कारी देवी और बालगुदर के शबनम देवी के नवजात को घर भेजा गया। इसके बाद से नवजातों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है।
पावर सप्लाई में तकनीकी खराबी के कारण बंद है वार्ड
रविवार दोपहर से ही वार्ड की इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई में तकनीकी खराबी आई। बुधवार तक ठीक नहीं हो सका। विभागीय स्तर पर भी कुछ नहीं हुआ। बिजली विभाग और स्वास्थ्य प्रबंधन को जानकारी होने के बावजूद ठीक नहीं कराया गया। न ही बिजली विभाग के टेक्नीशियन ने दुरुस्त किया। लिहाजा नवजात को भर्ती नहीं किया जा रहा। वार्ड की नर्स को भी परेशानी हो रही है।
एसएनसीयू में गंभीर रूप से बीमार शिशु का मुफ्त उपचार
एसएसीयू में नवजात को सात से 15 दिनों तक रखा जाता है। इस बीच सुधार नहीं हुआ तो और दिन रोका जाता है। अस्पताल में रोज औसतन तीन से चार नवजात का जन्म होता है। बीमार नवजात यहांं भर्ती होते हैं। प्राइवेट क्लीनिक में इसी के लिए तीन से पांच हजार रुपये प्रति दिन खर्च होता है। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इलाज के अभाव में कई नवजात की मौत हो सकती है।
वायरिंग में गड़बड़ी, इलेक्ट्रिशियन को हटाया गया
एसएनसीयू वार्ड के बिजली वायरिंग में गड़बड़ी आ गई थी। इलेक्ट्रिशियन की गड़बड़ी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। उस इलेक्ट्रिशियन को हटा दिया गया है। व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। जल्द ही एसएनसीयू में नवजातों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा। डीजल कमी की समस्या नहीं है। जब काम पड़ेगा आपूर्ति कर दिया जाएगा।
डॉ. आत्मानंद कुमार, सिविल सर्जन
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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/lakhisarai/news/treatment-of-newborns-in-sncu-stopped-for-three-days-due-to-carelessness-of-sadar-hospital-127542503.html

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