शुभकामना संदेश
भारत का धर्म दिव्य है । भारत की संस्कृति दिव्य है। भारत स्वयं में दिव्य है । भारत का कण-कण दिव्य है। इसकी दिव्यता को भव्यता में संजोए व बनाए रखना प्रत्येक भारतवासी का मौलिक कर्तव्य है । इसी को भारत की सामासिक संस्कृति कहा जाता है ।
' दिव्य रश्मि' पत्रिका भारत की दिव्यता और भव्यता की संवाहिका है । इसका हर पृष्ठ भारत के धर्म , संस्कृति और इतिहास की दिव्यता और भव्यता के लिए समर्पित है । निश्चय ही इसके इस पवित्र और शिवसंकल्प में भारत के भविष्य की उज्जवलता के दर्शन होते हैं । इसकी दिव्य रश्मियों में वह शक्ति व सामर्थ्य है जो हमें क्षितिज से मिला सकती है और भविष्य की कोख में छुपे हीरों का साक्षात्कार करा सकती है । यही कारण है कि इसका प्रत्येक अंक सहेज कर रखने योग्य होता है ।
पत्रिका के 5 वर्ष पूर्ण होने के इस पवित्र अवसर पर मैं समस्त संपादक मंडल को अपने शुद्ध अंतःकरण से हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूँ और आशा करता हूँ कि भविष्य में भी वह अपने मिशन की पताका को --
" ना तो झुकने देंगे ,
ना ही कभी रुकने देंगे ,
ना थकने देंगे और
ना ही कभी थमने देंगे ।।"
कल्याण भारत का करें यही एक उद्देश्य ।
मानवता हर्षित रहे -- विश्व गुरु हो देश ।।
"राकेश" भव्य भारत बने मिटें सर्व क्लेश ।
" दिव्य रश्मि" से है गूंजता एक यही संदेश ।।
-- डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष : भारतीय इतिहास पुनर्लेखन समिति
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