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सच्ची बात (हिंदी कविता)

सच्ची बात 


गिरीन्द्र मोहन मिश्र ,
फ़ोटो जर्नलिस्ट ,
जी.एम.ईस्टेट 
*******
लुगाई से करो  मन  की  बात, 
जनता से करो काम की बात ,
हमेशा तुम झूठ ही मत बोलो ,
जीवन  में  करो सच्ची  बात.

ये  मौका  दुबारा   नहीं  मिलेगा, 
ये जिन्दगी दुबारे  नहीं  मिलेगी ,
ज़िन्दगी है प्रेम से जीने का नाम,
यही है खुदा  का सच्चा  पैगाम .

ज़िन्दगी नहीं मिलती है  बार बार, 
ये  है  रब  का  बेहतरीन  सौगात, 
मुहब्बत ही है जीवन का अलंकार ,
पाक काम  से  करो  इसे  साकार .

गरीब गरीबी को छुपाने के लिए ,
तुमने खड़ा कर दिया था दीबार, 
तेरी हक़ीक़त  जान गया संसार. 
हक़ीक़त का जग ने किया दीदार. 

कितने और कैसे कैसे वादे किये ,
तेरे हर इरादे हमेशा  नापाक रहे,
जी.एम.मजबूर चले सड़को  पर,
भूखे का मौत हुआ है सड़को पर.

सच्चाई नहीं छुपी झूठे वसूलो से ,
ये स्थिति आयी  नाकामयाबी से ,
काश! अगर ज़मीर ज़िन्दा होता,
चमन में खुशियों का सैलाब होता
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