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हिंदू हृदय सम्राट अपराजेय योद्धा महाराणा प्रताप के पूण्यतिथि पर समर्पित शब्द श्रद्वांजली।

क्या ये जानते हैं आप?   (कविता)
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नाम सुनकर हीं सारे शत्रु-
करने लगता था बाप-बाप।।
         क्या ये जाते हैंं आप?
जब सारे हिंदुस्तान पर मुगल का शासन था,
उस समय अकेला हीं मातृभूमि के लिए-
लड रहा था महाराणा प्रताप।।
         क्या ये जानते हैं आप।१।
जब हिंदू अस्मिता कुचली जा रही थी,
धर्म और संस्कृति की पगडी उछाली जा रही थी।
सब नतमस्तक हो स्वीकार कर लिए थे हार-
घर से पकड पकडकर इज्ज़त निकाली जा रही थी।
तब वह घर में नहीं चैन से बैठा रहा चुपचाप।।
क्या ये जानते हैं आप।२।
अकबर करता रहा आक्रमण पर आक्रमण,
बहुत बार दिया वह संधि का भी आमंत्रण।
पर स्वराज और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया-
 और प्रतिद्वंद्वी बन करता रहा रण।
जय भवानी जय भारतभूमि का करते हुए जाप।
क्या ये जानते हैं आप।३।
जंगल जंगल खाक छानना स्वीकार किया,
उसकी हर किमत पर गुलामी को अस्वीकार किया।
भुख से तडपते उनके बच्चे,थे देश भक्त सच्चे-
स्वाभिमान की खातिर सर्वोच्च सत्ता की शक्ति को ललकार दिया।
आज भी हल्दीघाटी में गुंजता है वह चेतक का टाप।।
क्या ये जानते हैं आप।४।
उधर नब्बे हजार सेना थी इधर केवल बीस हजार-
अदम्य साहस के साथ बिना हताहत हुये करता रहा मार।
मुंह की खानी पडी थी मुगलों को यहां-
क्या घोडा था चेतक और क्या था महाराणा सवार।
इतिहास के पन्ने पर है अमिट वह छाप।
क्या ये जानते हैं आप।५।
हल्दीघाटी के युद्ध में घायल हुआ चेतक,
रौंदता रहा था वह अरिकुल को बन कुशल आखेटक।
किसीको कुछ समझ नहीं आ रहा था उस समय-
बस देखते हीं रह गये थे सब उसे उस क्षण एकटक।
सकुशल महाराणा को रख चेतक सो गया आप।
क्या ये जानते हैं आप।६।
बतलाता है इतिहास अमर वह परमवीर गुमानी था।
रहा सदैव वह अपराजेय चितौड गढ का अभिमानी था।।
वह राष्ट्रभक्त था वीर प्रखर रण कौशल गुणखानी था।
स्वराज और स्वराष्ट्र का उद्घोषक बलिदानी था।।
नाम सुनकर हीं राणा का शत्रु जाता था कांप।
क्या ये जानते हैं आप।७।
        ----:भारतका एक ब्राह्मण.
          संजय कुमार मिश्र"अणु"
                  --:अध्यक्ष:--
     साहित्य कला परिषद्,अरवल
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हिंदू हृदय सम्राट अपराजेय योद्धा महाराणा प्रताप के पूण्यतिथि पर समर्पित शब्दश्रद्वांजली।

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