ये कलम चलती है
(प्रेस स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष)
••••••••••••••••
ये कलम है सदा चलते रहती है,
जो सच होता है लिखते रहती है,
किसी के कहने से नहीं बदलती है,
बदहाली में भी सच ही लिखती है.
सच्ची कलम सच के साथ रहती है,
किसी भी कीमत पर नहीं बिकती है,
तभी तो सदा ज़मीर जिन्दा रहती है,
कलम की मृत्यु कभी नहीं होती है.
डर धमकी से कलम नहीं डरती है,
सच श्रृंगार है उसी का कद्र करती है,
सच लिखने से ही पहचान बनती है,
ज़मीर बेचने से मौत बेहतर होती है.
सच्ची कलम में आतिश होती है,
कलम की कूबत तनीज़ मिटाती है,
ज़मीर की कूबत अमर बनाती है,
जी.एम.कलम से सत्ता भी थर्राती है.
©
गिरीन्द्र मोहन मिश्र ,
फ़ोटो जर्नलिस्ट ,
जी.एम.ईस्टेट

